CAPF सम्मेलन: नए कानून लागू होने के बाद पीएम मोदी करेंगे अर्धसैनिक बलों के शीर्ष अधिकारियों की बैठक, आईबी को मिली जिम्मेदारी
नई दिल्ली। देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के शीर्ष नेतृत्व की एक अहम कॉन्फ्रेंस आयोजित करने जा रही है। इस विशेष सम्मेलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे, जबकि इसके आयोजन की जिम्मेदारी खुफिया ब्यूरो (IB) को सौंपी गई है।
यह पहली बार होगा जब केवल CAPF के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए अलग से इस तरह का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। अब तक आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए सालाना डीजी-आईजी सम्मेलन आयोजित होता रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री शामिल होते रहे हैं।
नए CAPF कानून के बाद पहला बड़ा आयोजन
हाल ही में संसद से पारित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद देश में CAPF से जुड़ा नया कानून लागू हो गया है। इसी के बाद यह सम्मेलन प्रस्तावित किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक सभी केंद्रीय बलों को आदेश जारी कर सम्मेलन के एजेंडे के लिए विभिन्न रैंकों से सुझाव मांगे गए हैं। अधिकारियों को अपने सुझाव 20 अप्रैल तक संबंधित फोर्स मुख्यालय भेजने होंगे। डीजी स्तर पर समीक्षा के बाद ये सुझाव आईबी को भेजे जाएंगे, जहां से इन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) कार्यालय तक पहुंचाया जाएगा।
सम्मेलन का उद्देश्य क्या है
इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य CAPF नेतृत्व को एक यूनिफाइड प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है, ताकि—
- आंतरिक सुरक्षा की नई चुनौतियों पर सामूहिक रणनीति बन सके
- आतंकवाद और नक्सलवाद जैसे खतरों से निपटने की रणनीति मजबूत हो
- केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके
- ऑपरेशनल और प्रशासनिक सुधारों पर विचार किया जा सके
बताया जा रहा है कि जिस तरह डीजी-आईजी सम्मेलन का आयोजन आईबी करती है, उसी तर्ज पर CAPF सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। हालांकि सम्मेलन की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
नए कानून को लेकर विरोध भी शुरू
दूसरी ओर, CAPF के पूर्व कैडर अधिकारियों ने नए कानून का विरोध शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि नए प्रावधानों से कैडर अधिकारियों की पदोन्नति के अवसर प्रभावित होंगे और गृह मंत्रालय को अत्यधिक प्रशासनिक शक्तियां मिल जाएंगी।
इसी मुद्दे को लेकर ‘अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन’ के बैनर तले पूर्व अधिकारी और उनके परिजन 6 मई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
पूर्व अधिकारियों का कहना है कि सीआरपीएफ और बीएसएफ जैसे बलों में कंपनी कमांड करने वाले सहायक कमांडेंट को 15 वर्ष की सेवा के बाद भी पहली पदोन्नति नहीं मिल पा रही है, जिससे उनके पूरे करियर पर असर पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री तक पहुंचाई जाएगी अफसरों की आवाज
सूत्रों के अनुसार, कैडर अधिकारी इस सम्मेलन को अपनी समस्याएं सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने के अवसर के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि चाहे आतंकवाद विरोधी अभियान हों या नक्सल विरोधी ऑपरेशन, CAPF ने हर जिम्मेदारी सफलतापूर्वक निभाई है, इसलिए सेवा शर्तों और पदोन्नति व्यवस्था पर भी गंभीर विचार जरूरी है।
सरकार की ओर से इसे आंतरिक सुरक्षा तंत्र को आधुनिक और समन्वित बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में सम्मेलन की तारीख और विस्तृत एजेंडा घोषित किए जाने की संभावना है।

