CISF के हजारों जवानों को बड़ा झटका: 53 यूनिटों में ‘जोखिम-कठिनाई भत्ता’ बंद, वेतन में होगी भारी कटौती
नई दिल्ली: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की 53 इकाइयों में तैनात हजारों जवानों और अधिकारियों के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। जोखिम एवं कठिनाई (Risk & Hardship) भत्ता तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है, जिससे संबंधित कार्मिकों को हर महीने करीब 22 हजार से 30 हजार रुपये तक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद हुई समीक्षा
जानकारी के अनुसार गृह मंत्रालय ने 6 मार्च को CISF मुख्यालय को निर्देश दिया था कि वर्ष 2019 के कार्यालय ज्ञापन (OM) के तहत दिए जा रहे जोखिम एवं कठिनाई भत्ते की पुनः समीक्षा की जाए। मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि यह भत्ता केवल उन्हीं जवानों और अधिकारियों को दिया जाए जो 22 फरवरी 2019 के OM के अनुसार निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं।
इसके बाद CISF महानिदेशालय ने सभी संबंधित यूनिटों में तैनात कार्मिकों की स्थिति का आकलन किया। समीक्षा पूरी होने के बाद कई इकाइयों में भत्ता बंद करने का निर्णय लिया गया।
किन राज्यों की इकाइयाँ प्रभावित
भत्ते बंद किए जाने वाली 53 इकाइयों में सबसे अधिक यूनिटें झारखंड में बताई जा रही हैं। इसके अलावा तेलंगाना और पश्चिम बंगाल की कुछ इकाइयाँ भी इस फैसले से प्रभावित हुई हैं। इन स्थानों पर जोखिम और कठिनाई का स्तर कम आंके जाने के बाद भत्ता समाप्त किया गया।
क्या होता है जोखिम एवं कठिनाई भत्ता
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों और अधिकारियों को जोखिमपूर्ण एवं कठिन क्षेत्रों में तैनाती के दौरान अतिरिक्त आर्थिक सहायता के रूप में यह भत्ता दिया जाता है। इसे जोखिम और कठिनाई के स्तर के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
- R1H1: उच्च जोखिम / उच्च कठिनाई
- R1H2: उच्च जोखिम / मध्यम कठिनाई
- R1H3: उच्च जोखिम / कम कठिनाई
जम्मू-कश्मीर, नक्सल प्रभावित क्षेत्र, उत्तर-पूर्व के संवेदनशील इलाके तथा अन्य चुनौतीपूर्ण स्थान आमतौर पर इस श्रेणी में शामिल होते हैं।
जोखिम कम होने पर हटाया जाता है भत्ता
सरकारी नियमों के अनुसार किसी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति सुधरने या जोखिम एवं कठिनाई का स्तर कम होने पर संबंधित यूनिट से यह भत्ता वापस लिया जा सकता है। CISF मुख्यालय ने इसी प्रावधान के तहत समीक्षा के बाद भत्ते समाप्त किए हैं।

