गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में पेश किया CAPF (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) बिल 2026, विपक्षी सांसदों ने किया कड़ा विरोध
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में Central Armed Police Forces (General Administration) Bill, 2026 पेश किया, जिस पर INDIA गठबंधन के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया। विपक्ष ने इस विधेयक को संघीय ढांचे के खिलाफ बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए।
प्रस्तावित बिल के अनुसार CAPF में इंस्पेक्टर जनरल (IG) स्तर के 50 प्रतिशत पद प्रतिनियुक्ति (Deputation) से भरे जाएंगे। वहीं अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) रैंक के कम से कम 67 प्रतिशत पद और स्पेशल डीजी व डीजी स्तर के सभी पद केवल प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाने का प्रावधान किया गया है।
विपक्षी सांसदों ने कहा कि यह प्रावधान वर्ष 2025 में दिए गए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के फैसले की भावना के विपरीत है, जिसमें CAPF कैडर में प्रतिनियुक्ति वाले पदों को समयबद्ध तरीके से कम करने की बात कही गई थी।
विधेयक को लेकर सदन में उस समय तीखी नोकझोंक देखने को मिली जब तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने बिल के विरोध में मौन प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी आपत्ति रखने के लिए केवल एक मिनट का समय दिया गया और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दबाने की कोशिश बताया।
राज्यसभा के सभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि उन्हें निर्धारित समय के अनुसार बोलने का अवसर दिया गया था और निर्धारित समय पूरा होने के बाद उनकी बात रिकॉर्ड में नहीं जाएगी।
विपक्ष की आपत्तियों का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह विधेयक न्यायपालिका या न्यायिक समीक्षा के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता। उन्होंने कहा कि संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा और सशस्त्र बलों से जुड़े विषयों पर कानून बनाने का अधिकार संसद को है। यह बिल केवल प्रशासनिक ढांचा, भर्ती, प्रतिनियुक्ति और सेवा संबंधी व्यवस्थाओं को स्पष्ट करने के लिए लाया गया है।
संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने भी विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि संसद को कानून बनाने का संवैधानिक अधिकार है और न्यायपालिका कानून की व्याख्या करती है, न कि विधायी जिम्मेदारियां निभाती है।
यह बिल अब राज्यसभा में विस्तृत चर्चा और आगे की विधायी प्रक्रिया के लिए लिया जाएगा।

