दूसरी शादी के आरोप में बर्खास्त CRPF जवान को हाईकोर्ट से राहत, बहाली का आदेश
कलकत्ता हाई कोर्ट ने दूसरी शादी के आरोप में बर्खास्त किए गए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक जवान को बड़ी राहत देते हुए उसकी सेवा बहाल करने का आदेश दिया है। अदालत ने साफ कहा कि जवान को केवल सुनी-सुनाई बातों और संदेह के आधार पर नौकरी से निकाला गया था, जो न्यायसंगत नहीं है।
मामला पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिले में तैनात एक कॉन्स्टेबल से जुड़ा है, जिसे दूसरी शादी के आरोप में 11 जून 2020 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। आरोप था कि कर्नाटक निवासी इस जवान ने पहले से शादीशुदा होने के बावजूद 2001 में त्रिपुरा की एक महिला से दूसरी शादी कर ली थी। हालांकि, जवान ने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उसकी केवल एक ही पत्नी है, जिससे उसकी शादी 1997 में हुई थी और यह पूरा मामला गलत पहचान का नतीजा है।
इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि कोर्ट अपील अथॉरिटी की तरह काम नहीं कर रहा, लेकिन जब किसी मामले में ठोस सबूतों की कमी हो या कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन हो, तो न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है। अदालत ने पाया कि विभागीय कार्रवाई में जवान को दोषी ठहराने के लिए कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किया गया था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि ऐसी कार्रवाई को जारी रहने दिया जाता, तो इससे जवान को पेशेवर, व्यक्तिगत और मानसिक रूप से गंभीर नुकसान हो सकता था। इसलिए उसे तत्काल प्रभाव से बहाल करने का आदेश दिया गया।
गौरतलब है कि बर्खास्तगी के खिलाफ जवान ने पहले विभागीय स्तर पर कई अपीलें की थीं, जिन्हें खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से उसे आखिरकार राहत मिली।
हालांकि, मामले में यह भी सामने आया कि जवान को पहले एक फर्जी हॉस्टल सब्सिडी क्लेम के मामले में सजा मिल चुकी है, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा दूसरी शादी के आरोप से अलग है।
इस फैसले के साथ ही अदालत ने यह संदेश दिया है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई ठोस सबूतों के आधार पर ही की जानी चाहिए, केवल शक या अपुष्ट रिपोर्ट के आधार पर नहीं।

