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Sikkim High Court का अहम फैसला: पुराने आपराधिक केस छुपाने के मामलों में बर्खास्त SSB कांस्टेबल को किया बहाल

गंगटोक। Sikkim High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में Sashastra Seema Bal (SSB) के उस कांस्टेबल की सेवा बहाल करने का आदेश दिया है, जिसे भर्ती के समय दो पुराने आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति के सामाजिक-आर्थिक हालात को नजरअंदाज कर उसके चरित्र का आकलन नहीं किया जा सकता।

अदालत ने अपने फैसले में प्रसिद्ध आयरिश लेखक Oscar Wilde की प्रसिद्ध पंक्ति का उल्लेख करते हुए कहा— “हर संत का एक अतीत होता है और हर पापी का एक भविष्य।”

सामाजिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखना जरूरी

यह फैसला जस्टिस A Muhamed Mustaque की पीठ ने 9 मार्च को सुनाया। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति का व्यवहार और मानसिकता अक्सर उसके सामाजिक और आर्थिक परिवेश से प्रभावित होती है। इसलिए सरकारी नौकरी में चरित्र और उपयुक्तता का मूल्यांकन करते समय इन परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि अत्यधिक गरीबी में जन्मे व्यक्ति से वही सामाजिक व्यवहार अपेक्षित नहीं किया जा सकता जो अपेक्षाकृत बेहतर परिस्थितियों में पले-बढ़े व्यक्ति से किया जाता है।

क्या था मामला

याचिकाकर्ता उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के एक गांव का रहने वाला है और मैट्रिक तक पढ़ा हुआ है। उसने 2020 में SSB में कांस्टेबल (वॉशरमैन) पद के लिए आवेदन किया था। वह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे से चयनित हुआ और 5 मार्च 2024 को सिक्किम के गेयजिंग स्थित 36वीं बटालियन में नियुक्त हुआ।

लेकिन अगस्त 2024 में उसे यह कहते हुए सेवा से हटा दिया गया कि उसने भर्ती फॉर्म भरते समय दो आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी।

दोनों मामलों की स्थिति

अदालत में बताया गया कि—

  • पहला मामला जांच में झूठा पाया गया था।
  • दूसरा मामला परिवारिक विवाद से जुड़ा था, जिसे 2023 में समझौते के जरिए निपटा दिया गया और याचिकाकर्ता बरी हो गया।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामूली मामलों का उसके भविष्य के रोजगार से कोई सीधा संबंध नहीं है। यदि अपराध गंभीर न हों और पद संवेदनशील न हो, तो नियोक्ता को ऐसे मामलों में लचीलापन दिखाना चाहिए

कोर्ट की अहम टिप्पणी

अदालत ने कहा कि यदि ऐसे व्यक्ति को स्थायी रूप से दोषी ठहराकर नौकरी से बाहर रखा जाता है तो यह उसके जीवन पर स्थायी कलंक बन जाएगा और संविधान के उस उद्देश्य के खिलाफ होगा जो सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने की बात करता है।

इसी आधार पर अदालत ने SSB द्वारा की गई बर्खास्तगी को रद्द कर दिया और कांस्टेबल की सेवा बहाल करने का आदेश दिया।

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