CISF के पूर्व ASI ने किया अपने ही साथियों के NPS फंड से 60 लाख का गबन: ED ने हैदराबाद कोर्ट में दायर की चार्जशीट
हैदराबाद। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के कर्मियों के राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) खातों से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने राष्ट्रीय औद्योगिक सुरक्षा अकादमी (एनआईएसए), हैदराबाद में तैनात रहे सीआईएसएफ के पूर्व सहायक उप निरीक्षक (एएसआई)/मंत्रालयी कर्मचारी रूप सिंह मीणा के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत मामला दर्ज किया है।
ईडी द्वारा इस मामले में रंगारेड्डी न्यायालय, हैदराबाद में अभियोग शिकायत (प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर की गई थी, जिस पर न्यायालय ने 28 जनवरी को संज्ञान ले लिया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई तेलंगाना पुलिस द्वारा 18 अप्रैल 2023 को दर्ज एफआईआर संख्या 418/2023 (आईपीसी की धारा 409 और 420) के आधार पर शुरू की गई थी। आरोप है कि रूप सिंह मीणा ने सीआईएसएफ के सेवारत और गैर-सेवारत (इस्तीफा दे चुके) कर्मियों के एनपीएस अंशदान की राशि को बेईमानी से और बिना किसी अधिकार के अन्य एनपीएस खातों में स्थानांतरित किया।
ईडी की जांच में सामने आया है कि आरोपी ने स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या (एसटी) से जुड़े बैंक खातों के विवरण में हेरफेर किया। तय समय से पहले निकासी (प्रीमैच्योर विदड्रॉअल) के फर्जी अनुरोध तैयार कर एनपीएस खातों से धनराशि निकाल ली गई। यह गबन उस समय किया गया, जब रूप सिंह मीणा एनआईएसए, हैदराबाद के एनपीएस अनुभाग में हेड कांस्टेबल/क्लर्क के पद पर तैनात था और उसके पास सीडीडीओ सीआईएसएफ, एनआईएसए से जुड़े सभी एनपीएस खातों तक पूर्ण लॉगिन पहुंच थी।
ईडी के मुताबिक, इस हेराफेरी के जरिए कुल 60,26,321 रुपये की राशि का गबन किया गया। मामले की आगे की जांच जून 2025 में सीबीआई और एसीबी, हैदराबाद को सौंप दी गई थी।
धन शोधन की जांच में यह भी पाया गया कि आरोपी ने एनपीएस से निकाली गई राशि को वैध दिखाने के लिए अपने नाम के साथ-साथ परिवार के सदस्यों, दोस्तों और अन्य असंबंधित व्यक्तियों के नाम पर खोले गए कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया। इनमें से कुछ खाताधारक अपने खातों के वास्तविक उपयोग से अनभिज्ञ थे। अपराध की आय को कई खातों में जमा कर बाद में अपने खातों में ट्रांसफर किया गया, जबकि कुछ रकम नकद निकाल ली गई।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने गबन की गई राशि का बड़ा हिस्सा अपनी शादी के खर्च, चिकित्सा उपचार, पुराने कर्ज चुकाने, डेयरी व्यवसाय में निवेश और अन्य व्यक्तिगत जरूरतों में खर्च कर दिया।
ईडी ने इससे पहले पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत अनंतिम कुर्की आदेश संख्या 25/HYZO/2025 (दिनांक 25 मार्च 2025) जारी कर रूप सिंह मीणा की 80,626 रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों की पहचान कर उन्हें कुर्क किया था।
मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

