CAPF अधिकारी अब साल में 50 रातें सीमावर्ती गांवों में बिताएंगे,MHA का नया निर्देश
भारत की पूर्वी सीमाओं पर बढ़ती घुसपैठ, तस्करी और आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने एक बड़ा निर्देश जारी किया है। मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के अधिकारियों और सीमावर्ती राज्यों की पुलिस को आदेश दिया है कि वे साल में कम से कम 50 रातें सीमा पर स्थित गांवों में बिताएं।
पश्चिम बंगाल सीमा पर विशेष नजर
गृह मंत्रालय के इस निर्देश में विशेष रूप से पश्चिम बंगाल जैसे संवेदनशील राज्यों पर जोर दिया गया है। पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लगभग 2,200 किलोमीटर लंबी सीमा है। नदियों, दलदली क्षेत्रों और घनी आबादी के कारण इस सीमा का एक बड़ा हिस्सा ‘पोरस’ (छिद्रपूर्ण) है, जहां बाड़ लगाना एक बड़ी चुनौती रही है। हाल के दिनों में बांग्लादेश में बढ़ी राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथी गतिविधियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने सुरक्षा के मोर्चे पर यह सक्रिय कदम उठाया है।
रायपुर सम्मेलन में बनी रणनीति
सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय पिछले साल नवंबर में रायपुर में आयोजित महानिदेशक-महानिरीक्षक (DG-IG) सम्मेलन में लिया गया था। गृह मंत्रालय का मानना है कि केवल बाड़ लगाने और गश्त करने से सीमा सुरक्षित नहीं की जा सकती। स्थानीय निवासियों का विश्वास जीतना और उनके माध्यम से जमीनी खुफिया जानकारी (Intelligence) जुटाना सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
वाइब्रेंट विजिलेंट प्रोग्राम’ का हिस्सा
यह पहल केंद्र सरकार के ‘वाइब्रेंट विजिलेंट प्रोग्राम’ के अंतर्गत शुरू की गई है, जिसे 10 अप्रैल, 2023 को लॉन्च किया गया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास के साथ सुरक्षा को एकीकृत करना है।
- अधिकारियों की भूमिका: गांवों में प्रवास के दौरान अधिकारी स्थानीय युवाओं, जनप्रतिनिधियों, एनसीसी कैडेट्स और सामाजिक संस्थाओं से संवाद करेंगे।
- चिह्नित जिले: विशेष रूप से मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना और कूचबिहार जैसे जिलों पर ध्यान दिया जाएगा, जो तस्करी और अवैध घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं।
- ग्रामीण बनेंगे ‘आंख और कान’: सरकार चाहती है कि सीमा पर रहने वाले लोग सुरक्षा बलों के लिए “आंख और कान” का काम करें ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत मिल सके।
सुरक्षा के साथ सामाजिक स्थिरता पर जोर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले भी स्पष्ट किया था कि CAPF की भूमिका केवल सीमा की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने में भी योगदान देना होगा।

