GPRA योजना: बेदखली के नोटिस और करोड़ों का जुर्माना, संकट में CAPF जवानों के परिवार
नई दिल्ली: देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा में तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के अधिकारियों और जवानों के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। ‘जनरल पूल रेजिडेंशियल अकॉमोडेशन’ (GPRA) योजना के तहत सरकारी आवासों में रहने की तीन साल की समय सीमा समाप्त होने के बाद, अब उन्हें भारी जुर्माने और बेदखली के नोटिस थमाए जा रहे हैं।
1 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, संपदा निदेशालय (Directorate of Estates) ने लगभग 800 से अधिक सीएपीएफ कर्मियों पर भारी ‘डैमेज चार्ज’ (जुर्माना) लगाया है। कुछ मामलों में तो यह जुर्माना राशि 1 करोड़ रुपये के आंकड़े को भी पार कर गई है। इस स्थिति ने जवानों और उनके परिवारों के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
भेदभाव का आरोप: CPWD को छूट, जवानों को नहीं
इस विवाद ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) को पत्र लिखकर इस नीति की समीक्षा की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई है कि:
- CPWD कर्मियों को राहत: सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के कर्मचारियों को 31 मार्च, 2030 तक आवास रखने की विशेष छूट दी गई है।
- जवानों के साथ असमानता: गृह सचिव ने तर्क दिया कि सीएपीएफ जवान बेहद कठिन जलवायु और चुनौतीपूर्ण इलाकों में तैनात रहते हैं, जो अन्य सरकारी कर्मचारियों की तुलना में कहीं अधिक कठिन है। ऐसे में उन्हें इस राहत से वंचित रखना उनके मनोबल पर बुरा असर डाल रहा है।
शिक्षा और परिवार पर संकट
अधिकारियों का कहना है कि सीएपीएफ कर्मियों की ड्यूटी ऐसी होती है कि वे एक के बाद एक ‘नॉन-फैमिली स्टेशनों’ (जैसे कश्मीर, उत्तर-पूर्व या नक्सल प्रभावित क्षेत्र) में तैनात रहते हैं। ऐसे में दिल्ली और अन्य महानगरों में स्थित ये आवास ही उनके बच्चों की शिक्षा और परिवार की चिकित्सा जरूरतों का एकमात्र सहारा हैं।
“जवानों का कहना है कि अगर उन्हें ये घर खाली करने पड़े, तो उन्हें निजी तौर पर महंगे किराए के घर लेने होंगे या अपने परिवारों को वापस गांव भेजना होगा, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।”
गृह मंत्रालय की पहल
2 दिसंबर, 2025 को जारी एक पत्र में, गृह मंत्रालय ने उन सभी कर्मियों का विवरण मांगा है जो इस जुर्माने से प्रभावित हुए हैं। मंत्रालय अब उचित अधिकारियों के माध्यम से इन जुर्मानों को माफ करने और कम से कम इस शैक्षणिक सत्र के अंत तक आवास सुविधा जारी रखने की मांग करने की तैयारी में है।
पूर्व में पूर्व गृह मंत्री राजनाथ सिंह और पूर्व गृह सचिव राजीव गौबा ने भी आवास मंत्रालय के सामने इस मुद्दे को उठाया था ताकि सीएपीएफ को इस कड़ी नीति से बाहर रखा जा सके।

