बिना अनुमति लंबे समय तक ड्यूटी से गायब रहे BSF के तीन कांस्टेबल, हाईकोर्ट ने सेवा से हटाने का फैसला बरकरार रखा
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रशिक्षण के दौरान बिना अनुमति लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले सीमा सुरक्षा बल (BSF) के तीन कांस्टेबलों को सेवा से हटाने की कार्रवाई को सही ठहराया है। अदालत ने तीनों पूर्व कांस्टेबलों की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि वर्दीधारी बलों में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है और कोई भी कर्मचारी अपनी मर्जी से कर्तव्य से अनुपस्थित नहीं रह सकता।
जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया।
प्रशिक्षण के दौरान कैंप छोड़कर चले गए थे
मामले के अनुसार, त्रिलोक चंद साहू, तीरथ दास बर्मन और लक्ष्मीनारायण पटेल की नियुक्ति वर्ष 2008-09 में कांस्टेबल के पद पर हुई थी। जून 2009 में तीनों को महाराष्ट्र के चाकुर स्थित BSF स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर में बुनियादी प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था।
प्रशिक्षण के दौरान तीनों बिना अनुमति कैंप छोड़कर चले गए और निर्धारित समय पर वापस नहीं लौटे। रिकॉर्ड के अनुसार, त्रिलोक चंद साहू और तीरथ दास बर्मन करीब 47-47 दिन तक अनुपस्थित रहे, जबकि लक्ष्मीनारायण पटेल करीब 70 दिन बाद वापस लौटा।
विभाग ने सेवा से कर दिया था बाहर
लंबे समय तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहने के बाद विभाग ने वर्ष 2010 में तीनों को एक महीने का नोटिस देकर सेवा से हटा दिया था। इसके खिलाफ तीनों ने विभागीय अपील और दया याचिका दाखिल की, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।
इसके बाद तीनों ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि वे स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अनुपस्थित रहे थे और उनके पास इससे संबंधित दस्तावेज भी मौजूद थे।
वहीं, विभाग ने अदालत में कहा कि वर्दीधारी बल में बिना अनुमति लंबे समय तक अनुपस्थित रहना गंभीर अनुशासनहीनता है और ऐसी स्थिति में कड़ी कार्रवाई उचित है।
अस्थायी कर्मचारी होने का भी दिया आधार
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि तीनों कर्मचारी स्थायी कर्मचारी नहीं थे, बल्कि 1960 के नियमों के तहत अस्थायी कर्मचारी थे। उन्होंने तीन वर्ष की सेवा पूरी नहीं की थी, इसलिए उन्हें क्वासी-पर्मानेंट कर्मचारी का दर्जा भी प्राप्त नहीं हुआ था।
अदालत ने माना कि ऐसे अस्थायी कर्मचारियों की सेवा नियम 12 के तहत एक महीने के नोटिस पर समाप्त की जा सकती है और इसके लिए विभागीय जांच अनिवार्य नहीं थी।
अनुशासन को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
अदालत ने प्रशिक्षण अधूरा छोड़कर लंबे समय तक बिना अनुमति गायब रहने को गंभीर मामला माना। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्दीधारी बलों में अनुशासन और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता बेहद महत्वपूर्ण है।
अदालत ने विभाग द्वारा की गई सेवा समाप्ति की कार्रवाई को उचित ठहराते हुए तीनों पूर्व कांस्टेबलों की याचिकाएं खारिज कर दीं।
फैसले का सार: हाईकोर्ट ने माना कि प्रशिक्षण के दौरान बिना अनुमति लंबे समय तक अनुपस्थित रहने वाले अस्थायी BSF कर्मियों के खिलाफ नियमों के तहत सेवा समाप्ति की कार्रवाई वैध थी।

