20 साल बाद भी नहीं भूला BSF परिवार, दिवंगत जवान की बेटी की शादी में पहुंची 31वीं बटालियन
कर्नाह, जम्मू-कश्मीर। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने अपने दिवंगत जवान के परिवार के साथ खड़े होकर एक बार फिर फोर्स के आपसी रिश्ते और भाईचारे की मिसाल पेश की है। करीब दो दशक पहले BSF जवान रफीक अहमद का शिलांग में हार्ट अटैक से निधन हो गया था। अब उनकी बेटी महिदा की शादी के मौके पर BSF की 31वीं बटालियन के जवान कर्नाह के गबरा स्थित उनके घर पहुंचे और परिवार की खुशियों में शामिल हुए।
BSF कर्मियों ने परिवार से मुलाकात कर बेटी को शादी की शुभकामनाएं दीं। साथ ही शादी के लिए उपहार और जरूरी सामान भेंट किया तथा समारोह की तैयारियों में भी परिवार का सहयोग किया।
पिता के बाद बेटा-बेटी भी BSF में कर रहे सेवा
गबरा निवासी रफीक अहमद BSF में तैनात थे। वर्ष 2007 में शिलांग में हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया था। खास बात यह है कि उनकी देश सेवा की विरासत अब उनके दोनों बच्चे आगे बढ़ा रहे हैं। उनके बेटे आदिल और बेटी महिदा, दोनों वर्तमान में BSF में सेवा दे रहे हैं।
शादी समारोह में मौजूद BSF के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे भावुक क्षण बताते हुए कहा कि पिता ने फोर्स की सेवा की और आज उनके दोनों बच्चे भी उसी फोर्स में सेवा दे रहे हैं। ऐसे खास अवसर पर BSF परिवार उनसे दूर नहीं रह सकता था।
स्थानीय लोगों ने की BSF के कदम की सराहना
BSF के इस कदम की स्थानीय लोगों ने भी सराहना की। लोगों ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और स्थानीय आबादी के बीच रिश्ता केवल सुरक्षा ड्यूटी तक सीमित नहीं है। आग लगने, आपात स्थिति और दूसरी मुश्किल परिस्थितियों में भी BSF और अन्य सुरक्षा बल स्थानीय लोगों की मदद के लिए आगे आते रहे हैं।
स्थानीय निवासी मोहम्मद यूसुफ ने कहा कि BSF को उन्होंने मुश्किल समय में लोगों के साथ खड़े होते देखा है और आज फोर्स अपने एक पूर्व जवान के परिवार की खुशी में शामिल हुई है। यह आपसी भाईचारे को दर्शाता है।
एक अन्य स्थानीय निवासी अब्दुल राशिद ने कहा कि बेटी की शादी में उसके पिता मौजूद नहीं थे, लेकिन जिस वर्दी की उन्होंने सेवा की थी, वह परिवार के साथ खड़ी नजर आई। यह जवानों के परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि उनकी सेवा को भुलाया नहीं जाता।
कर्नाह में BSF के कदम की चर्चा
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बल और आम लोग कई मौकों पर एक परिवार की तरह एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं। शादी हो या मुश्किल घड़ी, यह रिश्ता समय-समय पर देखने को मिलता है।
31वीं बटालियन BSF द्वारा रफीक अहमद के परिवार के साथ खड़े होने को स्थानीय समुदाय ने सम्मान और भाईचारे की मिसाल बताया। स्थानीय बुजुर्ग गुलाम नबी ने कहा कि इस पहल को कर्नाह के लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।
वहीं, कर्नाह के लोगों ने रफीक अहमद की बेटी को शादी की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखी और समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना की।

