CISF जवान की बहाली नहीं होने पर हाईकोर्ट सख्त, अधिकारियों से मांगा जवाब
पटना। पटना हाईकोर्ट ने CISF से हटाए गए नवनीत कुमार यादव की सेवा बहाली से जुड़े अवमानना मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि किसी आदेश के खिलाफ LPA (Letters Patent Appeal) दाखिल कर देना मात्र उस आदेश को लागू नहीं करने का आधार नहीं हो सकता, जब तक कि संबंधित आदेश पर रोक न लगाई गई हो। यह आदेश जस्टिस सत्यव्रत वर्मा की पीठ ने 8 अक्टूबर 2026 को दिया।
2020 में CISF सेवा से हटाए गए थे नवनीत यादव
मामले के अनुसार, नवनीत कुमार यादव को जनवरी 2020 में CISF की सेवा से हटा दिया गया था। उन्होंने विभागीय कार्रवाई, सेवा से हटाने के आदेश तथा अपील में पारित आदेश को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी रिट याचिका वर्ष 2020 से लंबित थी।
करीब छह साल बाद 2 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट ने उनकी रिट याचिका स्वीकार करते हुए सेवा से हटाने के आदेश के साथ अपीलीय और पुनरीक्षण आदेश को भी रद्द कर दिया था। अदालत ने CISF को आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो महीने के भीतर नवनीत कुमार यादव को दोबारा सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया था।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया था कि सेवा से बाहर रहने की अवधि के लिए उन्हें वेतन और अन्य भुगतान नहीं मिलेगा। इस अवधि को अन्य लाभों के लिए नोटशनल रूप से सेवा में गिना जाएगा और अनधिकृत अनुपस्थिति को उनके खाते में उपलब्ध छुट्टी के रूप में समायोजित किया जाएगा।
समय सीमा बीती, बहाली नहीं हुई तो पहुंचा अवमानना मामला
नवनीत कुमार यादव ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि अदालत द्वारा तय समय सीमा के बावजूद उन्हें सेवा में वापस नहीं लिया गया। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि 2 जुलाई के आदेश को LPA No. 927 of 2026 में चुनौती दी गई है।
इस पर याचिकाकर्ता ने स्वयं अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि केवल LPA दाखिल होने से मूल आदेश का पालन रोका नहीं जा सकता, क्योंकि उस आदेश पर कोई रोक नहीं लगी है। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग चाहे तो उनसे यह अंडरटेकिंग लेकर बहाल कर सकता था कि उनकी बहाली LPA के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील से जताई सहमति
पटना हाईकोर्ट ने इस दलील से पूरी तरह सहमति जताई। कोर्ट ने कहा कि केवल LPA दाखिल करना रिट कोर्ट के आदेश को लागू न करने का आधार नहीं है, जब तक उस आदेश पर रोक न लगी हो या उच्चतर पीठ ने उसमें हस्तक्षेप न किया हो।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि अधिकारियों ने याचिकाकर्ता से अंडरटेकिंग लेकर उसे सेवा में बहाल किया होता तो यह रिट कोर्ट के आदेश के प्रति सम्मान दर्शाता।
CISF अधिकारियों को अलग-अलग जवाब दाखिल करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा। हाईकोर्ट ने Opposite Party No. 2 और 5 की ओर से अलग-अलग शपथपत्र के साथ शो-कॉज दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे निर्धारित की गई है।

