जम्मू में आतंकवाद विरोधी मोर्चे पर CRPF की बड़ी जिम्मेदारी, सेना के 21 कैंप संभालेंगी CoBRA कंपनियां
जम्मू-कश्मीर: जम्मू डिविजन में आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी अभियानों को लेकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की भूमिका और बढ़ने जा रही है। CRPF जम्मू डिविजन में सेना के 21 कैंपों की जिम्मेदारी संभालने की तैयारी कर रहा है। इनमें 15 कैंप कठुआ और 6 कैंप उधमपुर जिले में स्थित हैं।
CRPF की ओर से जारी एक आदेश के मुताबिक, इन कैंपों पर कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन (CoBRA) की कंपनियों को तैनात किया जाएगा। CoBRA CRPF की विशेष कमांडो यूनिट है, जिसे जंगलों में आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी अभियानों तथा गुरिल्ला युद्ध की विशेष ट्रेनिंग हासिल है।
कठुआ और उधमपुर में बढ़ेगी CoBRA की मौजूदगी
CRPF के अनुसार, जम्मू डिविजन में अलग-अलग समय पर करीब दो दर्जन CoBRA कंपनियां तैनात रही हैं। अब कठुआ और उधमपुर जैसे संवेदनशील इलाकों में उनकी तैनाती को और व्यवस्थित किया जा रहा है।
सुरक्षा के लिहाज से कठुआ और उधमपुर बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन इलाकों में घुसपैठ की कोशिशों और आतंकियों की गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा बल लगातार सतर्क रहते हैं।
CRPF सूत्रों के मुताबिक, सेना से कैंपों की जिम्मेदारी लेने और वहां CRPF की तैनाती की योजना पर कई महीनों से काम चल रहा था। जम्मू जोन के CRPF अधिकारियों ने इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा भी की है।
लंबे समय की रणनीति का हिस्सा है बदलाव
CRPF अधिकारियों के अनुसार, CoBRA की 18 कंपनियों की नई तैनाती और अलग-अलग कैंपों में उनकी जिम्मेदारी तय करना पिछले वर्ष तैयार की गई लंबी अवधि की रणनीतिक योजना का हिस्सा है।
केंद्र सरकार की रणनीति के तहत जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में CRPF की भूमिका को बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य सेना और राष्ट्रीय राइफल्स पर मौजूद कुछ ऑपरेशनल जिम्मेदारियों का बोझ कम करना और सुरक्षा व्यवस्था में CRPF की भागीदारी बढ़ाना है।
एक CRPF सूत्र के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था में लंबे समय से इस बात पर विचार किया जा रहा था कि आतंकवाद विरोधी अभियानों की कुछ जिम्मेदारियां CRPF को दी जाएं। इसके लिए सेना और CRPF के बीच जिम्मेदारियों के सुचारू हस्तांतरण की योजना कई महीनों से बनाई जा रही थी।
‘जंगल वॉरियर्स’ के नाम से मशहूर है CoBRA
CoBRA को CRPF की सबसे विशेष ऑपरेशनल यूनिट्स में गिना जाता है। जंगलों और कठिन इलाकों में उग्रवादियों को तलाशने, उनका पीछा करने और ऑपरेशन चलाने की क्षमता के कारण इन्हें ‘जंगल वॉरियर्स’ भी कहा जाता है।
शुरुआत में CoBRA को मुख्य रूप से मध्य भारत के वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित इलाकों में तैनात किया जाता था। हालांकि, समय के साथ CRPF ने CoBRA की क्षमताओं का इस्तेमाल देश के अलग-अलग संवेदनशील इलाकों में करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।
2023 में भी जम्मू-कश्मीर भेजी गई थीं CoBRA कंपनियां
जम्मू-कश्मीर के इलाकों और वहां की ऑपरेशनल परिस्थितियों को समझने के उद्देश्य से 2023 में गृह मंत्रालय ने CoBRA की छह कंपनियों को जम्मू-कश्मीर में तैनात किया था।
हालांकि, बाद में इन कंपनियों को जम्मू-कश्मीर से वापस बुलाकर वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में फिर से तैनात कर दिया गया था।
अब जम्मू डिविजन में CoBRA की नई तैनाती को सुरक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। सेना के 21 कैंपों की जिम्मेदारी मिलने से जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियानों में CRPF की भूमिका पहले के मुकाबले और मजबूत होने की उम्मीद है।

