पहली शादी के रहते दूसरी शादी CRPF जवान को पड़ी भारी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी को ठहराया सही
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक पूर्व कांस्टेबल की सेवा से बर्खास्तगी को बरकरार रखते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पहली शादी के कायम रहते बिना पूर्व विभागीय अनुमति दूसरी शादी करना केंद्रीय बल के कर्मचारी के लिए गंभीर कदाचार है। ऐसे मामले में विभागीय कार्रवाई के तहत सेवा से बर्खास्तगी की सजा दी जा सकती है।
जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने यह फैसला प्रभु सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य मामले में सुनाया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की उस चुनौती को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी सेवा से बर्खास्तगी और विभागीय कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।
1988 में CRPF में भर्ती हुआ था कांस्टेबल
याचिकाकर्ता वर्ष 1988 में CRPF में कांस्टेबल (वाटर कैरियर) के पद पर भर्ती हुआ था। रिकॉर्ड के अनुसार उसकी पहली शादी वर्ष 1976 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी और पहली पत्नी से उसके बच्चे भी थे।
इसके बावजूद उसने पहली शादी के रहते वर्ष 1992 में दूसरी शादी कर ली। आरोप था कि दूसरी शादी करने से पहले उसने विभाग से आवश्यक पूर्व अनुमति नहीं ली और इस संबंध में विभाग को भी सूचित नहीं किया।
दूसरी पत्नी को बनाया था नॉमिनी
मामले में यह तथ्य भी सामने आया कि कर्मचारी ने दूसरी महिला को अपने सर्विस रिकॉर्ड में नॉमिनी बनाया था। हालांकि, उसे दूसरी पत्नी के रूप में घोषित नहीं किया गया था। बाद में विभागीय जांच के दौरान उससे दूसरी शादी के संबंध में पूछताछ की गई।
विभागीय कार्यवाही में कर्मचारी ने दूसरी शादी किए जाने की बात स्वीकार की। इसके बाद विभाग ने उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए 8 जुलाई 2011 को सेवा से हटा दिया।
कर्मचारी ने विभागीय अपील और पुनरीक्षण के माध्यम से इस कार्रवाई को चुनौती दी, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। इसके बाद उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
हाईकोर्ट ने सेवा नियमों का दिया हवाला
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान CRPF Rules, 1955 के Rule 15 और CCS (Conduct) Rules, 1964 के Rule 21 का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि लागू सेवा नियमों के तहत पहली शादी के कायम रहते दूसरी शादी करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना और आवश्यक पूर्व अनुमति लेना जरूरी है।
कोर्ट ने माना कि बिना अनुमति दूसरी शादी करना केवल कर्मचारी का निजी मामला नहीं है, बल्कि यह सेवा आचरण से जुड़े नियमों का उल्लंघन है।
CRPF Act की धारा 11 के तहत बर्खास्तगी संभव
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि CRPF Act, 1949 की धारा 11(1) के तहत विभाग गंभीर कदाचार के मामलों में बर्खास्तगी जैसी सजा भी दे सकता है। कोर्ट ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के Union of India v. Ghulam Mohammad Bhat मामले में दिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 11 को केवल छोटी सजाओं तक सीमित नहीं माना जा सकता। परिस्थितियों के अनुसार इसके तहत कठोर विभागीय दंड भी दिया जा सकता है।
अनुशासित बल में आचरण का महत्व
अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि CRPF जैसे अनुशासित सशस्त्र बल में कर्मचारियों से उच्च स्तर के आचरण और अनुशासन की अपेक्षा की जाती है। ऐसे मामलों में विभाग को बल की अनुशासनात्मक व्यवस्था और उसकी सार्वजनिक छवि को ध्यान में रखने का अधिकार है।
कोर्ट ने कर्मचारी को दी गई बर्खास्तगी की सजा को न तो अत्यधिक कठोर और न ही असंगत माना।
हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज
सभी तथ्यों और लागू सेवा नियमों पर विचार करने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही उसकी सेवा से बर्खास्तगी और विभागीय कार्रवाई को बरकरार रखा गया।
इस फैसले से यह संदेश स्पष्ट है कि CRPF और अन्य अनुशासित केंद्रीय बलों में पहली शादी के रहते दूसरी शादी करने जैसे मामलों में लागू सेवा नियमों का उल्लंघन गंभीर विभागीय कदाचार माना जा सकता है और परिस्थितियों के अनुसार नौकरी से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है।

