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CAPF NEWS

क्या 8वें वेतन आयोग द्वारा शामिल की जाएंगी CAPF जवानों की पैरामिलिट्री सर्विस पे’ और पुरानी पेंशन (OPS) जैसी प्रमुख मांगें?

8वें वेतन आयोग के गठन के साथ ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के लाखों जवानों और अधिकारियों की उम्मीदें एक बार फिर तेज हो गई हैं। ये मांगें केवल वेतन बढ़ोतरी से ही संबंधित नहीं हैं, बल्कि पहचान, सम्मान और दशकों से लंबित संरचनात्मक सुधारों से जुड़ी हैं। CAPF के जवान सेना के समान ही सीमाओं की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा में सबसे कठिन मोर्चों पर तैनात रहते हैं, तो उन्हें भी समान अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए।

OPS की बहाली सबसे अहम मुद्दा

पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली CAPF जवानों की सबसे बड़ी और संवेदनशील मांग बनी हुई है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में CAPF जवानों को ‘सशस्त्र बल (Armed Forces)’ की श्रेणी में माना है, जिससे OPS के मुद्दे पर जवानों के पक्ष को कानूनी मजबूती मिली है।

हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा इस फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जवानों और संगठनों की नजरें अब सर्वोच्च न्यायालय पर टिकी हैं, क्योंकि वहां से आने वाला फैसला यह तय करेगा कि CAPF कर्मियों को भी सेना की तरह पुरानी पेंशन का लाभ मिलेगा या नहीं।
8वें वेतन आयोग के समक्ष इस पृष्ठभूमि में OPS का मुद्दा और भी मजबूत रूप में उठाए जाने की तैयारी है।

पैरामिलिट्री सर्विस पे’ (PSP) की मांग
भारतीय सेना को ‘मिलिट्री सर्विस पे’ (MSP) मिलता है, जबकि CAPF को ऐसा कोई समकक्ष भत्ता नहीं दिया जाता। अर्धसैनिक बलों के जवानों की 24×7 जोखिमभरी तैनाती, दुर्गम इलाके और युद्ध जैसी परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें ‘पैरामिलिट्री सर्विस पे’ दिया जाना चाहिए, ताकि उनकी सेवा की विशेष प्रकृति को आर्थिक मान्यता मिल सके।

OGAS और NFU: कानूनी हक, लेकिन अधूरा लाभ
सुप्रीम कोर्ट द्वारा CAPF को ‘ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस’ (OGAS) का दर्जा दिए जाने के बावजूद, अधिकारियों का कहना है कि इसके वास्तविक लाभ अभी पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं। ‘नॉन-फंक्शनल अपग्रेडेशन’ (NFU) लागू होने से लंबे समय तक एक ही पद पर अटके अधिकारियों को आर्थिक राहत मिल सकती है। 8वें वेतन आयोग से अपेक्षा है कि वह OGAS और NFU को प्रभावी ढंग से लागू करने की स्पष्ट सिफारिश करे।

पदोन्नति में ठहराव बड़ी समस्या
CAPF में पदोन्नति की धीमी रफ्तार गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। PBOR श्रेणी में एक जवान को पहला प्रमोशन पाने में 20 से 22 साल तक लग जाते हैं। वहीं अधिकारियों में 1997 बैच तक के कई अधिकारी अब भी ‘टू-इन-कमांड’ के पद पर हैं। बलों में रैंक स्ट्रक्चर में सुधार कर सेना की तर्ज पर समयबद्ध पदोन्नति सुनिश्चित की जाए।

8वें वेतन आयोग से बड़ी उम्मीदें
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 8वां वेतन आयोग CAPF को ‘सच्चे सैनिक’ के रूप में मान्यता देता है, तो न केवल वेतन और भत्तों में सुधार होगा, बल्कि बलों के मनोबल और कार्यकुशलता में भी बढ़ोतरी होगी। अब नजरें इस पर टिकी हैं कि आयोग CAPF की इन लंबे समय से लंबित मांगों पर क्या फैसला करता है।

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Editorial Desk – News of Paramilitary

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