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व्हिसलब्लोअर को ट्रांसफर से हमेशा छूट नहीं मिल सकती: CRPF जवान की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में यह स्पष्ट किया है कि कोई भी कर्मचारी या जवान सिर्फ यह दावा करके कि वह आंतरिक व्हिसलब्लोअर है, ट्रांसफर से स्थायी रूप से छूट का हकदार नहीं हो सकता। कोर्ट का यह निर्णय केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक जवान द्वारा दायर याचिका पर आया।

जवान ने 17 जुलाई को नोएडा से मणिपुर की 87वीं बटालियन में अपने ट्रांसफर के खिलाफ याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि ट्रांसफर ऑर्डर दुर्भावना से प्रेरित था और यह अधिकारियों द्वारा उसकी व्हिसलब्लोइंग गतिविधियों का बदला लेने के लिए किया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उसे बार-बार निशाना बनाया गया, निराधार आरोपपत्र जारी किए गए और ट्रांसपोर्ट अलाउंस देने से भी इनकार किया गया।

दूसरी ओर, CRPF के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि यह सिर्फ रूटीन ट्रांसफर था और इसका कोई दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य नहीं था। उन्होंने बताया कि जवान की वर्तमान पोस्टिंग का समय पूरा होने के बाद यह निर्णय लिया गया।

जस्टिस सी. हरिशंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने नौ पन्नों के विस्तृत आदेश में यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के ट्रांसफर और कथित व्हिसलब्लोइंग के बीच कोई सबूतित संबंध नहीं पाया गया। कोर्ट ने कहा कि ट्रांसफर नौकरी का एक अनिवार्य हिस्सा है और केवल आरोप लगाने या व्हिसलब्लोअर होने का दावा करके कोई कर्मचारी हमेशा के लिए ट्रांसफर से बच नहीं सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा, “यदि कोई जवान अदालत को यह साबित कर देता है कि उसके व्हिसलब्लोइंग गतिविधियों और ट्रांसफर ऑर्डर के बीच प्रत्यक्ष संबंध है, तो कोर्ट हस्तक्षेप करने का अधिकार रखती है।”

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