तीन बार राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित BSF के पूर्व आईजी सुरजीत सिंह गुलेरिया का निधन
37 वर्षों तक सीमा सुरक्षा में दिया अतुलनीय योगदान, पूरे BSF में शोक की लहर
सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सेवानिवृत्त महानिरीक्षक (IG) और तीन बार राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित जांबाज अधिकारी सुरजीत सिंह गुलेरिया का सोमवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर निधन हो गया। वे 62 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उन्होंने दिल्ली के मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली।
उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे बीएसएफ बल में शोक की लहर दौड़ गई। बल ने एक ऐसा अधिकारी खो दिया है, जिसने अपने पूरे जीवन को राष्ट्र और सीमा सुरक्षा के लिए समर्पित कर दिया।

हिमाचल प्रदेश से बीएसएफ के शीर्ष नेतृत्व तक का प्रेरणादायी सफर
मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के देहरा तहसील अंतर्गत खैरिया गांव निवासी सुरजीत सिंह गुलेरिया वर्ष 1987 में सहायक कमांडेंट के रूप में बीएसएफ में शामिल हुए थे। लगभग 37 वर्षों की निष्कलंक और असाधारण सेवा के बाद वे अप्रैल 2024 में कोलकाता स्थित पूर्वी कमान मुख्यालय से आईजी (बॉर्डर ऑपरेशंस) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
बंगाल सीमा पर तस्करी के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई
गुलेरिया ने भारत–बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा, विशेषकर दक्षिण बंगाल फ्रंटियर में लंबे समय तक सेवाएं दीं। वर्ष 2019 से जुलाई 2022 तक डीआईजी (जी–इंटेलिजेंस) के रूप में उनके कार्यकाल को बीएसएफ के सबसे प्रभावशाली दौरों में गिना जाता है।
उनकी सटीक खुफिया रणनीति और कड़े ऑपरेशनों के चलते कभी मवेशी तस्करी के लिए कुख्यात रही बंगाल सीमा पर करीब 70 प्रतिशत तक होने वाली तस्करी पर निर्णायक प्रहार हुआ, जिसे लगभग पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
आतंकवाद से लेकर आपदा राहत तक अहम भूमिका
गुलेरिया ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के शुरुआती दौर में तैनात रहते हुए आतंकी गतिविधियों की कमर तोड़ने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा पंजाब, राजस्थान और बंगाल जैसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में भी उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया।
प्रतिनियुक्ति के दौरान एनडीआरएफ में रहते हुए उन्होंने देशभर में कई आपदा राहत अभियानों का नेतृत्व किया और अनेक बहुमूल्य जिंदगियां बचाईं। बंगाल के हरिणघाटा और बिहार के बिहटा में एनडीआरएफ की दो बटालियनों की स्थापना का श्रेय भी उन्हें जाता है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत का गौरव बढ़ाया
वर्ष 2001–02 में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत कोसोवो में तैनाती के दौरान भी गुलेरिया ने महत्वपूर्ण अभियानों में प्रभावशाली भूमिका निभाई और भारत का नाम रोशन किया।
वीरता और उत्कृष्ट सेवा के लिए मिले अनेक सम्मान
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए उन्हें—
- 2008 में सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक
- 2016 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक
- 2021 में वीरता के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक
से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें 20 से अधिक बार बीएसएफ महानिदेशक का प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया गया।
बीएसएफ डीजी और बल के जवानों ने जताया शोक
बीएसएफ के महानिदेशक आईपीएस प्रवीण कुमार सहित बल के सभी रैंकों के अधिकारियों और जवानों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। बीएसएफ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर कहा कि “इस दुख की घड़ी में पूरा प्रहरी परिवार गुलेरिया परिवार के साथ मजबूती से खड़ा है।”
पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
सुरजीत सिंह गुलेरिया का अंतिम संस्कार मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित उनके पैतृक गांव में पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ किया गया।
बीएसएफ डीआईजी एके आर्य ने उन्हें याद करते हुए कहा कि “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उनका योगदान, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के बीएसएफ अधिकारियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।”


I am retaired from Jommu 107 Bn bsf Samba. Asi Bsf troops doing very difficult job in this area