NPS या OPS: क्या BSF ‘सशस्त्र बल’ है या ‘सिविलियन’? गृह मंत्रालय ने RTI के जवाब में पल्ला झाड़ा,अब BSF द्वारा दी जाएगी जानकारी
नई दिल्ली: सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई एक जानकारी ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) की संवैधानिक स्थिति और उसके जवानों की पेंशन प्रणाली को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। बीकानेर निवासी नवरत्न चौधरी द्वारा दायर एक आरटीआई के जवाब में गृह मंत्रालय (MHA) ने मामले को सीमा सुरक्षा बल के मुख्यालय स्थानांतरित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
आवेदक नवरत्न चौधरी ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय से दो मुख्य बिंदुओं पर स्पष्टीकरण और दस्तावेजों की मांग की थी:
- पेंशन प्रणाली: 22 दिसंबर 2003 के राजपत्र के अनुसार, नई अंशदान पेंशन प्रणाली (NPS) देश के ‘सशस्त्र बलों’ पर लागू नहीं होनी थी। आवेदक का सवाल है कि यदि BSF एक सशस्त्र बल है, तो उस पर यह नई पेंशन प्रणाली किस आदेश के तहत लागू की गई?
- सशस्त्र बल बनाम नागरिक विभाग: 1968 के राजपत्र के अनुसार BSF एक सशस्त्र बल है। आवेदक ने उस आदेश की प्रति मांगी है जिसके तहत BSF को कथित रूप से सशस्त्र बल की श्रेणी से हटाकर ‘नागरिक विभाग’ (Civilian Department) में शामिल किया गया हो।
गृह मंत्रालय का रुख
गृह मंत्रालय के ‘पुलिस-द्वितीय प्रभाग’ (Pers-IV Section) ने 12 जनवरी 2026 को जारी अपने जवाब में कहा है कि मांगी गई जानकारी उनके कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सीमा सुरक्षा बल से संबंधित सभी प्रस्तावों की फाइलें ‘एकल मिसिल प्रणाली’ के आधार पर आती हैं और निर्णय के बाद वापस BSF को भेज दी जाती हैं क्योंकि फाइलों का असली संरक्षक BSF ही है।
इसी कारण, गृह मंत्रालय ने RTI अधिनियम की धारा 6(3) का उपयोग करते हुए इस आवेदन को उप महानिरीक्षक (सामान्य) एवं केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी, सीमा सुरक्षा बल को स्थानांतरित कर दिया है।
जवानों के भविष्य पर सवाल
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर हजारों जवानों की सामाजिक सुरक्षा और उनकी सेवा की प्रकृति से जुड़ा है। यदि राजपत्र के अनुसार सशस्त्र बल NPS से बाहर हैं, तो अर्धसैनिक बलों (CAPFs) के जवानों को इस दायरे में रखने के कानूनी आधार पर सवाल उठ रहे हैं।
अगला कदम
मंत्रालय ने आवेदक को सूचित किया है कि यदि वे इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं, तो 30 दिनों के भीतर गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पुलिस-II) के समक्ष प्रथम अपील दायर कर सकते हैं। अब सबकी नजरें सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवाब पर टिकी हैं, जो इस संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट करेगा।



