रामपुर CRPF कैंप हमला मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को किया बरी, रद्द हुई फांसी और उम्रकैद की सजा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2007 में उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हुए आतंकी हमले के सभी पांच आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई चार आरोपियों की फांसी और एक आरोपी की उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया है।
यह हमला 31 दिसंबर 2007 की रात हुआ था, जब आतंकियों ने ए.के.-47 राइफलों और ग्रेनेड से सीआरपीएफ कैंप पर हमला कर दिया था। इस हमले में सीआरपीएफ के 7 जवान शहीद हो गए थे और एक रिक्शा चालक की भी मौत हो गई थी।
क्या था मामला
सेशन कोर्ट, रामपुर ने 2 नवंबर 2019 को चार आरोपियों—मोहम्मद शरीफ, सबाउद्दीन, इमरान शहजाद और मोहम्मद फारूख—को फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि जंग बहादुर को उम्रकैद दी गई थी। वहीं मोहम्मद कौसर और गुलाब खान को पहले ही बरी कर दिया गया था।
आरोपियों ने इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद 4 सितंबर 2025 को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है। अदालत ने सबूतों की समीक्षा के बाद सभी पांचों आरोपियों को बरी कर दिया।
हमले की पृष्ठभूमि
31 दिसंबर 2007 की रात आतंकियों ने रामपुर स्थित सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर के गेट नंबर तीन से भीतर घुसकर फायरिंग शुरू कर दी थी। हमले में सात जवान शहीद हुए थे और एक रिक्शा चालक की मौत हो गई थी। घटना के बाद 1 जनवरी 2008 को एफआईआर दर्ज की गई थी।
मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और स्थानीय पुलिस ने की थी। जांच में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के इमरान शहजाद, मो. फारुख, बिहार के सबाउद्दीन, रामपुर के मोहम्मद शरीफ, मुरादाबाद के जंग बहादुर समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। सभी आरोपी लखनऊ और बरेली जेलों में बंद थे।
पाकिस्तान में मारा गया था साजिशकर्ता
इस हमले का मास्टरमाइंड माने जाने वाला सैफुल्लाह 18 मई 2025 को पाकिस्तान में एक मुठभेड़ में मारा गया था।
सुरक्षा व्यवस्था सख्त
कोर्ट का फैसला आने से पहले रामपुर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया था। जिलाधिकारी ने बताया कि अदालत परिसर सहित संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।


Kya jawano ko marne wale ko saja nhi milna chahiye tha jo unko bari kr diya gya h