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राजस्थान हाईकोर्ट: CRPF कांस्टेबल की बर्खास्तगी रद्द और बहाली के आदेश |कहा- “गलत आरोप पर टिकी अनुशासनात्मक कार्रवाई मान्य नहीं”

जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक कांस्टेबल को बड़ी राहत देते हुए उसकी बहाली का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की नींव ही गलत आरोपों पर आधारित हो, तो बाद में जांच के नतीजों के आधार पर उन आरोपों को बदला या हल्का नहीं किया जा सकता।

​मामला क्या था?

​यह मामला हंस राज बनाम भारत संघ (Hans Raj v Union of India & Ors.) का है। याचिकाकर्ता, जो CRPF में कांस्टेबल के पद पर तैनात था, अपनी ट्रेनिंग के दौरान 20 दिनों तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहा था। अनुपस्थिति का कारण गुर्दे (किडनी) में पथरी की वजह से होने वाला तेज दर्द था।

​कांस्टेबल 20 दिनों के बाद स्वेच्छा से ड्यूटी पर लौट आया था, लेकिन विभाग ने उसे “भगोड़ा” (Deserter) घोषित करते हुए चार्जशीट जारी की और अंततः उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया। इसी आदेश को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां: अनुशासन बनाम न्याय

​जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए विभाग की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां निम्नलिखित हैं:

  • गलत वर्गीकरण: कोर्ट ने कहा कि अनुशासनात्मक अथॉरिटी को सज़ा देने से पहले दुर्व्यवहार को सही ढंग से वर्गीकृत (Classify) करना चाहिए। ‘बिना छुट्टी के अनुपस्थित रहना’ (AWL) और ‘बल से भाग जाना’ (Desertion) दो अलग-अलग चीजें हैं।
  • इरादे का अभाव: CRPF Act, 1949 के तहत “भगोड़ा” वह होता है जिसका इरादा सेवा को स्थायी रूप से छोड़ने का हो। चूंकि कांस्टेबल 20 दिन बाद खुद वापस आ गया था, इसलिए उसे भगोड़ा मानना “विवेक का इस्तेमाल न करना” और “शक्ति का दुरुपयोग” है।
  • नींव ही गलत: कोर्ट ने राज्य की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि चार्जशीट में सिर्फ ‘शब्द’ गलत था लेकिन इरादा सही था। कोर्ट ने कहा, “जब चार्जशीट की नींव ही गलत आरोप पर टिकी हो, तो विभाग बाद में इसे दोबारा इंटरप्रेट नहीं कर सकता।”

शानदार ट्रैक रिकॉर्ड को दी अहमियत

​सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता का पिछला सर्विस रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा था और उसे बेहतरीन प्रदर्शन के लिए कई प्रमाण पत्र भी मिले थे। अदालत ने कहा कि ऐसे समर्पित जवान को मेडिकल इमरजेंसी के कारण हुई अनुपस्थिति के लिए सेवा से हटाना पूरी तरह से अनुपातहीन (Disproportionate) है।

कोर्ट का संदेश: “अनुशासन को निष्पक्षता, तर्कसंगतता और इंसानियत की कीमत पर लागू नहीं किया जा सकता।”

​अंतिम फैसला

​राजस्थान हाईकोर्ट ने कांस्टेबल की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करते हुए उसे तुरंत बहाल करने का निर्देश दिया है।

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