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पिछले 11 वर्षों में CAPF से 23 हजार से अधिक इस्तीफे, तीन साल में 438 आत्महत्याएं , लोकसभा में गृह मंत्रालय ने प्रस्तुत किए विस्तृत आंकड़े

नई दिल्ली।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) में मानव संसाधन से जुड़ी गंभीर चुनौतियां सामने आई हैं। पिछले 11 वर्षों के दौरान सीएपीएफ और असम राइफल्स से 23 हजार से अधिक कर्मियों ने सेवा से इस्तीफा दिया है। इसके साथ ही बीते तीन वर्षों में इन बलों में आत्महत्या के 438 मामले दर्ज किए गए हैं, जो बलों में तनाव और मानसिक दबाव की स्थिति की ओर इशारा करते हैं।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में सीएपीएफ में आत्महत्या के 157 मामले सामने आए थे, जबकि 2025 में यह संख्या घटकर 133 रह गई है। आपसी हत्या की घटनाओं की बात करें तो 2023 में दो, 2024 में एक और 2025 में अब तक चार मामले दर्ज किए गए हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि पिछले तीन वर्षों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में आत्महत्या के सबसे अधिक 159 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में 120 और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में 60 आत्महत्याओं के मामले सामने आए हैं।

स्तीफों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2014 से 2025 के बीच सीएपीएफ और असम राइफल्स के कुल 23,360 कर्मियों ने नौकरी छोड़ी है। इनमें बीएसएफ से 7,493, सीआरपीएफ से 7,456 और सीआईएसएफ से 4,137 कर्मियों ने इस्तीफा दिया। केवल वर्ष 2025 में अब तक 3,077 इस्तीफे सामने आए हैं, जिनमें सबसे अधिक 1,157 इस्तीफे बीएसएफ से दर्ज किए गए हैं।

सेवा शर्तों को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में गृह राज्य मंत्री ने बताया कि सीएपीएफ कर्मी सामान्यतः आठ घंटे की शिफ्ट में काम करते हैं, हालांकि परिचालन आवश्यकताओं के आधार पर ड्यूटी के घंटे अलग-अलग हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि बटालियन संरचनाओं में आराम, प्रशिक्षण और अवकाश की व्यवस्था की गई है।

फील्ड में तैनात सीएपीएफ कर्मियों को प्रतिवर्ष कुल 75 दिनों का अवकाश दिए जाने का प्रावधान है। इसमें 60 दिन का अर्जित अवकाश और 15 दिन का आकस्मिक अवकाश शामिल है। मंत्रालय के अनुसार, यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि कर्मी यथासंभव अपने अवकाश का लाभ उठा सकें।

इन आंकड़ों ने एक बार फिर सीएपीएफ में कार्य स्थितियों, मानसिक स्वास्थ्य और कार्मिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जरूरत को रेखांकित किया है।

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