ओडिशा हाईकोर्ट का केंद्र को निर्देश: 2007 आतंकी हमले में स्थायी रूप से दिव्यांग CRPF जवान की पत्नी को हेड कांस्टेबल पद पर मिले अनुकंपा नियुक्ति
ओडिशा उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वर्ष 2007 में श्रीनगर में हुए आतंकी बम विस्फोट में स्थायी रूप से दिव्यांग हुए सीआरपीएफ जवान की पत्नी को अनुकंपा आधार पर हेड कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति प्रदान की जाए।
न्यायमूर्ति दीक्षित कृष्ण श्रीपद और न्यायमूर्ति चितरंजन दास की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में तैनात जवान यह विश्वास लेकर सेवा करते हैं कि यदि उनके जीवन या शरीर को कोई क्षति पहुँचती है, तो राज्य और नागरिक समाज उनके परिवारों के साथ खड़े होंगे। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह विश्वास कभी डगमगाना नहीं चाहिए।
पीठ ने प्रसिद्ध लेखक जॉर्ज ऑरवेल के कथन का हवाला देते हुए टिप्पणी की,
“लोग रात में अपने बिस्तरों पर चैन से इसलिए सो पाते हैं क्योंकि कुछ साहसी लोग उनकी सुरक्षा के लिए खड़े रहते हैं।”
ड्यूटी के दौरान आतंकी हमले में हुए थे दिव्यांग
यह मामला सीआरपीएफ के एक कांस्टेबल से संबंधित है, जो 23 जनवरी 2007 को श्रीनगर में ड्यूटी के दौरान आतंकवादियों द्वारा किए गए बम विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस हमले में वे स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए। इसके बाद उन्हें 7 मार्च 2014 को चिकित्सा कारणों से घर भेज दिया गया और अंततः वर्ष 2024 में सेवा से हटा दिया गया।
वर्षों से चल रही थी कानूनी लड़ाई
दिव्यांग जवान और उनकी पत्नी लंबे समय से अनुकंपा नियुक्ति की मांग कर रहे थे। यह मामला पहले 2014, 2015 और 2020 में भी ओडिशा उच्च न्यायालय के समक्ष आ चुका है। इसके बाद वर्तमान अपील दाखिल की गई, जिस पर अब फैसला आया है।
केवल कांस्टेबल पद देना उदार दृष्टिकोण नहीं: हाईकोर्ट
अनुकंपा नियुक्ति योजनाओं की उदार और मानवीय व्याख्या पर जोर देते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामले में केवल कांस्टेबल पद की पेशकश करना उचित नहीं है। अदालत ने माना कि यह रवैया अनुकंपा नियुक्ति के उद्देश्य और भावना के अनुरूप नहीं है।
अदालत ने केंद्र सरकार और सीआरपीएफ को निर्देश दिया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर दिव्यांग सीआरपीएफ जवान की पत्नी को हेड कांस्टेबल के पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए।
यह फैसला न सिर्फ संबंधित परिवार के लिए बड़ी राहत है, बल्कि यह देश के उन लाखों केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कर्मियों के लिए भी एक मजबूत संदेश है, जो राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपने जीवन और स्वास्थ्य को जोखिम में डालते हैं।


Jo desh ke liye apna jaan ki parwah nahi karte unko apne pariwar ke liye court se lardna parta hai hai jo sirf desh me koi koi v khel khelte hai unko dsp sp ka rank diya jata hai
Ye apna desh bharat