“कोई बेटा इस तरह न मरे”— देहरादून में जान गंवाने वाले त्रिपुरा के छात्र अंजेल चकमा के पिता, BSF जवान ने मांगा न्याय
देहरादून में जान गंवाने वाले त्रिपुरा के छात्र अंजेल चकमा के पिता, सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान तरुण प्रसाद चकमा, ने न्याय की गुहार लगाते हुए कहा है कि कोई भी माता-पिता अपने बच्चे को इस तरह खोने के हकदार नहीं हैं। इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने आरोपियों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की।
भावुक होते हुए तरुण चकमा ने कहा,
“मेरा बच्चा अब इस दुनिया में नहीं है। ऐसा किसी और के साथ नहीं होना चाहिए। हम पूरी तरह टूट चुके हैं। बस यही चाहते हैं कि आगे किसी और का बेटा इस तरह न मरे।”
उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला स्थानीय लोगों द्वारा किया गया।
“इस तरह की घटना पहले कभी नहीं हुई। यह पहली बार हुआ है और इसमें स्थानीय लोग शामिल थे,” उन्होंने कहा।
“अब माफी का सवाल नहीं, सिर्फ सख्त सजा चाहिए”
तरुण चकमा ने साफ शब्दों में कहा कि अगर उनका बेटा बच जाता तो वे आरोपियों को माफ कर सकते थे, लेकिन अब नहीं।
“अगर मेरा बच्चा जिंदा होता तो मैं माफ कर देता। लेकिन अब सभी आरोपियों को मौत की सजा मिलनी चाहिए। उन्हें फांसी दी जानी चाहिए।”
उन्होंने देश में नस्लीय टिप्पणी और भेदभाव की कड़ी निंदा करते हुए कहा,
“भारत जैसे विविधता भरे देश में यह बिल्कुल गलत है। देश के हर कोने से बच्चे पढ़ने के लिए बाहर जाते हैं। नस्लीय टिप्पणी किसी के साथ नहीं होनी चाहिए।”
कैसे हुआ हमला
पुलिस और परिजनों के अनुसार, 24 वर्षीय अंजेल चकमा, जो त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के रहने वाले थे और देहरादून में MBA की पढ़ाई कर रहे थे, पर 9 दिसंबर को हमला किया गया।
आरोप है कि हमलावरों ने अंजेल और उनके छोटे भाई माइकल चकमा पर नस्लीय टिप्पणियां कीं और उन्हें “चाइनीज़” कहकर अपमानित किया। जब अंजेल ने इसका विरोध किया, तो उन पर बेरहमी से हमला कर दिया गया।
गंभीर हालत में अंजेल को ग्राफिक एरा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने 17 दिनों तक जिंदगी से संघर्ष किया, लेकिन अंततः उनकी मौत हो गई।
पूर्वोत्तर के छात्रों में आक्रोश, देशभर में प्रदर्शन
अंजेल चकमा की मौत के बाद पूर्वोत्तर के छात्रों में भारी आक्रोश है। देहरादून, त्रिपुरा और देश के अन्य हिस्सों में कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
आयोग की सख्ती, FIR में जोड़ी गई हत्या की धारा
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने 23 दिसंबर को उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर इस मामले में पुलिस की लापरवाही का आरोप लगाया। आयोग के हस्तक्षेप के बाद FIR में हत्या की धारा जोड़ी गई।
पुलिस ने इस मामले में
- सूरज ख्वास (22) — मणिपुर निवासी
- अविनाश नेगी (25)
- सुमित (25)
को गिरफ्तार किया है, जबकि दो नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है। एक अन्य आरोपी के नेपाल फरार होने की आशंका है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए ₹25,000 का इनाम घोषित किया गया है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा,
“नस्लवाद को कभी सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।”
“अब मेरी लड़ाई हर छात्र के लिए है”
अंजेल चकमा के पिता ने कहा कि उनकी लड़ाई अब सिर्फ उनके बेटे के लिए नहीं है।
“मैं अपना बच्चा खो चुका हूं। अब यह लड़ाई हर उस छात्र के लिए है, जो पढ़ाई के लिए घर से बाहर जाता है। मेरे बेटे को न्याय मिलना ही चाहिए।”
(SOURCE – INDIA TODAY)

