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ITBP जवानों के लिए नई पहल: MACP पाने वाले जवान कहलाएंगे ‘सीनियर कांस्टेबल’ बाजू पर लगेगी विशेष फीती

नई दिल्ली।
लद्दाख के काराकोरम दर्रे से लेकर अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक 3,488 किलोमीटर लंबी भारत–चीन सीमा की सुरक्षा में तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने अपने जवानों के मनोबल और सेवा वरिष्ठता को सम्मान देने के उद्देश्य से एक अनूठी पहल शुरू की है। बल के महानिदेशक प्रवीण कुमार के आदेश पर अब आईटीबीपी के सिपाहियों की ‘सेवा’ वरिष्ठता को नई पहचान दी जाएगी।

इस नई व्यवस्था के तहत जिन सिपाहियों को पहला मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) मिल चुका है, वे अपने दाहिने हाथ पर एक विशेष ‘फीती’ पहनेंगे, जिस पर ‘सीनियर कांस्टेबल’ लिखा होगा। यह फीती कंधे से लगभग चार इंच नीचे दाहिने बाजू पर लगाई जाएगी। फीती का रंग पीला होगा, जबकि बैकग्राउंड हरा रहेगा और उस पर ‘सीनियर कांस्टेबल’ शब्द एरियल 16 फॉन्ट में अंकित रहेगा।

आईटीबीपी में कई बार सिपाहियों को पदोन्नति मिलने में लंबा समय लग जाता है। ऐसे में वर्षों का अनुभव और वरिष्ठता होने के बावजूद वे सिपाही के पद पर ही कार्य करते रहते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि अनुभवी जवानों को सम्मानजनक पहचान मिल सके और उनका उत्साह बना रहे।

हालांकि, स्पष्ट किया गया है कि इस फीती से सिपाहियों को कोई अतिरिक्त आर्थिक लाभ या वरिष्ठता सूची में बदलाव नहीं मिलेगा। यह पूरी तरह पहचान और सम्मान से जुड़ा कदम है। किसी ‘सीनियर सिपाही’ को अतिरिक्त या अलग जिम्मेदारी दी जाएगी या नहीं, यह संबंधित बटालियन के कमांडेंट या कार्यालय अधिकारी के विवेक पर निर्भर करेगा। यह कोई अधिकार नहीं, बल्कि प्रशासनिक निर्णय होगा।

जब किसी सिपाही को पहला वित्तीय अपग्रेडेशन (MACP) प्रदान किया जाएगा, तो आदेश में यह भी उल्लेख किया जाएगा कि वह अब ‘सीनियर सिपाही’ की फीती पहनने का पात्र है। जिन जवानों को पहले ही पहला MACP मिल चुका है, उनके लिए संबंधित कार्यालय अध्यक्ष द्वारा फीती लगाने का आदेश तत्काल प्रभाव से जारी किया जाएगा।

गौरतलब है कि पहले केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आर्मी की तर्ज पर लांस नायक और नायक जैसे पद हुआ करते थे। उस समय लांस नायक एक विशेष नियुक्ति (स्पेशल अपॉइंटमेंट) होता था, जिसमें स्पेशल पे मिलता था, लेकिन इसे नियमित पदोन्नति नहीं माना जाता था। बाद में सीएपीएफ में यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई और अब सिपाही से सीधे हवलदार बनने की प्रणाली लागू है। सेना में हालांकि आज भी लांस नायक और नायक के पद मौजूद हैं।

आईटीबीपी की अधिकांश सीमा चौकियां 9,000 फीट से लेकर 18,800 फीट तक की ऊंचाइयों पर स्थित हैं, जहां तापमान शून्य से 45 डिग्री सेल्शियस तक नीचे चला जाता है। आईटीबीपी न केवल एक विशेष सशस्त्र पुलिस बल है, बल्कि अपने जवानों को गहन सामरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ पर्वतारोहण, स्कीइंग और अन्य विशिष्ट कौशलों में भी प्रशिक्षित करती है।

इसके अलावा, हिमालयी क्षेत्र में आईटीबीपी को प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ के रूप में भी जाना जाता है। बीते वर्षों में बल ने सैकड़ों खोज, बचाव और राहत अभियानों का सफल संचालन कर हजारों नागरिकों की जान बचाई है। छह दशकों से अधिक के अपने स्वर्णिम इतिहास में आईटीबीपी के जवानों ने देश की सुरक्षा के लिए अनेक बलिदान दिए हैं।

आईटीबीपी की यह नई पहल अब अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भी चर्चा का विषय बन गई है, जहां यह सवाल उठने लगा है कि क्या सिपाहियों की सेवा वरिष्ठता को पहचान देने के लिए इसी तरह की व्यवस्था वहां भी लागू की जाएगी।

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