ITBP में पेंशन को लेकर बड़ी जानकारी: 87,921 जवानों में से केवल 89 ने चुनी UPS ,पुरानी पेंशन (OPS) पर टिका भरोसा
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) महानिदेशालय ने अर्धसैनिक बलों के जवानों को मिलने वाली पेंशन सुविधाओं और ‘शहीद’ के दर्जे के संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट गृह मंत्रालय को प्रेषित की है। यह रिपोर्ट लोकसभा सांसद अधिवक्ता चंद्रशेखर द्वारा उठाए गए बिंदुओं के जवाब में तैयार की गई है, जिसमें उन्होंने सशस्त्र सेनाओं के समान सुविधाएं प्रदान करने का विषय उठाया था।
बल के कुल 87,921 जवानों में से महज 89 कर्मियों ने ही यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को अपनाया है। इसके विपरीत, बड़ी संख्या में जवान अब भी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में बने हुए हैं।
नई योजना को लगभग नकार
1 अप्रैल 2025 से लागू UPS को एक बेहतर विकल्प के तौर पर पेश किया गया था, लेकिन ITBP में इसे लगभग नकार दिया गया। इतने बड़े बल में केवल 89 जवानों का UPS चुनना बताता है कि जमीनी स्तर पर इस योजना को लेकर भरोसा नहीं बन पाया है।
ITBP द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, बल के भीतर विभिन्न पेंशन योजनाओं को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की गई है। रिपोर्ट के मुख्य तथ्य निम्नलिखित हैं:
- एकीकृत पेंशन योजना (UPS): केंद्र सरकार द्वारा 1 अप्रैल, 2025 से लागू की गई इस नई योजना के प्रति जवानों का रुझान अत्यंत कम देखा गया है। ITBP की कुल 87,921 की नफरी में से अब तक केवल 89 कर्मियों ने ही UPS का विकल्प चुना है।
- पुरानी पेंशन योजना (OPS): वर्तमान में बल के 18,423 पदाधिकारी पुरानी पेंशन योजना के अंतर्गत आते हैं।
- राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS): 01 जनवरी, 2004 के बाद भर्ती हुए 69,409 जवान वर्तमान में NPS के दायरे में हैं।
रिपोर्ट में पेंशन विवाद से जुड़े कानूनी पहलुओं की भी जानकारी दी गई है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 मार्च, 2023 को अपने एक निर्णय में अर्धसैनिक बलों के लिए OPS बहाल करने का आदेश दिया था। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा इस निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर किए जाने के कारण यह मामला वर्तमान में विचाराधीन है।
समान सुविधाओं और दर्जे पर कार्रवाई
सांसद द्वारा अर्धसैनिक बलों को सशस्त्र सेनाओं (थल, नौ और वायु सेना) के समकक्ष ‘शहीद’ का दर्जा और अन्य सुविधाएं देने की मांग की गई थी। इस पर ITBP ने स्पष्ट किया है कि:
- इस विषय से संबंधित आवश्यक टिप्पणियां और जानकारी पूर्व में ही गृह मंत्रालय के ‘पुनर्वास एवं कल्याण निदेशालय’ को भेजी जा चुकी हैं।
- उद्देश्य यह है कि ड्यूटी के दौरान बलिदान देने वाले जवानों को मिलने वाले सम्मान और सुविधाओं में एकरूपता लाई जा सके।

ITBP के ये आंकड़े केवल संख्या नहीं, बल्कि जवानों की सोच को दर्शाते हैं। यह साफ संकेत है कि पेंशन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जवान किसी भी प्रयोग के बजाय भरोसे और स्थिरता को प्राथमिकता देते हैं।
UPS को मिला बेहद कम समर्थन बताता है कि अर्धसैनिक बलों में OPS की मांग सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। जब तक नई पेंशन व्यवस्था जवानों को OPS जैसी निश्चितता का भरोसा नहीं दे पाती, तब तक उनका झुकाव पुरानी पेंशन प्रणाली की ओर बना रहेगा।

