नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पत्र के बाद कर्नाटक सरकार ने CAPF जवानों के लिए पैरामिलिट्री वेलफेयर बोर्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू की
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के जवानों और सेवानिवृत्त कर्मियों के कल्याण को लेकर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक पहल सामने आई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को लिखे गए पत्र के बाद अब राज्य सरकार ने पैरामिलिट्री वेलफेयर बोर्ड के गठन की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।
दरअसल, 13 दिसंबर 2025 को राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर बताया था कि संसद में उनकी मुलाकात Ex-Paramilitary Forces Welfare Association के एक प्रतिनिधिमंडल से हुई थी, जो लगभग 20 लाख CAPF कर्मियों का प्रतिनिधित्व करता है। प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी को बताया कि CAPF जवानों से रक्षा बलों के समान जोखिम और जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद वेतन, पेंशन और कल्याण सुविधाओं में भेदभाव किया जाता है। इसका सीधा असर जवानों और उनके परिवारों के मनोबल पर पड़ता है, यहां तक कि शहीद जवानों के मामलों में भी असमानता देखने को मिलती है।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया था कि अधिकांश मांगें केंद्र सरकार से जुड़ी हैं, जिन पर वे संसद और राजनीतिक स्तर पर समर्थन देंगे, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकारों को भी पूर्व-CAPF कर्मियों की मदद के लिए अपने स्तर पर पहल करनी चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने सैनिक कल्याण बोर्ड की तर्ज पर राज्यों में पैरामिलिट्री वेलफेयर बोर्ड गठित करने का सुझाव दिया, जिससे सेवानिवृत्त CAPF जवानों और उनके परिवारों को कल्याण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन (Resettlement) में सहायता मिल सके।
राहुल गांधी के इस पत्र के जवाब में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2 जनवरी 2026 को उन्हें पत्र लिखकर जानकारी दी कि राज्य सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव और गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को कर्नाटक में पैरामिलिट्री वेलफेयर बोर्ड की स्थापना के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। यह बोर्ड मौजूदा सैनिक कल्याण ढांचे की तर्ज पर काम करेगा।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पत्र में CAPF जवानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि देश की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा में अर्धसैनिक बलों का योगदान अतुलनीय है। कठिन परिस्थितियों में लंबे समय तक सेवा देने के बाद कई जवान कम उम्र में ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं, ऐसे में उन्हें सम्मानजनक जीवन, पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राहुल गांधी की पहल और उसके बाद कर्नाटक सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया ने CAPF कल्याण के मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो अन्य राज्य सरकारें भी कर्नाटक की तर्ज पर पैरामिलिट्री वेलफेयर बोर्ड गठित करने की दिशा में कदम उठा सकती हैं, जिससे देशभर के लाखों अर्धसैनिक जवानों और उनके परिवारों को सीधा लाभ मिल सकता है।



