44 दिन से लापता CRPF जवान का कंकाल कैंप परिसर में मिला, ब्रेसलेट-घड़ी-अंगूठी से हुई पहचान
नीमच (मध्य प्रदेश):
मध्य प्रदेश के नीमच स्थित केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) परिसर के भीतर एक जवान का कंकाल मिलने से हड़कंप मच गया है। मृतक जवान की पहचान 44 दिनों से लापता चल रहे सीआरपीएफ कांस्टेबल नंदकिशोर प्रजापति के रूप में हुई है। यह कंकाल परिसर में झाड़ियों की नियमित सफाई के दौरान बरामद हुआ।
कंकाल मिलने की सूचना के बाद मौके पर जवानों और अधिकारियों की भीड़ जमा हो गई। वरिष्ठ अधिकारी भी तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। बाद में मृतक की पहचान उसके व्यक्तिगत सामानों के आधार पर की गई।
व्यक्तिगत सामानों से हुई पहचान
परिजनों ने बताया कि घटनास्थल से बरामद ब्रेसलेट, अंगूठी, मोबाइल फोन और कपड़ों के आधार पर नंदकिशोर की पहचान की गई। परिवार के अनुसार, नंदकिशोर अपना ब्रेसलेट कभी नहीं उतारते थे। जैसे ही परिजनों ने ब्रेसलेट देखा, वे बेसुध हो गए। इस दर्दनाक खुलासे के बाद पूरे सीआरपीएफ परिसर में सनसनी फैल गई।
राजस्थान के राजसमंद जिले के थे निवासी
44 वर्षीय नंदकिशोर प्रजापति, अमरचंद प्रजापति के पुत्र थे और राजस्थान के राजसमंद जिले के भीम क्षेत्र के रहने वाले थे। परिजनों के मुताबिक, नंदकिशोर 27 दिसंबर 2025 को अचानक लापता हो गए थे। कई बार कॉल करने के बावजूद जब संपर्क नहीं हो सका, तो परिवार ने नीमच स्थित सीआरपीएफ कार्यालय से संपर्क किया।
परिवार का आरोप है कि उन्हें बार-बार यह कहकर टाल दिया गया कि नंदकिशोर 50 दिन की छुट्टी पर घर गए हैं, और छुट्टी पूरी होने के बाद ही खोज शुरू की जाएगी।
समय पर नहीं हुई कोई ठोस कार्रवाई
परिजनों का कहना है कि दिन हफ्तों में बदलते चले गए। वे नीमच से दिल्ली तक अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे। वरिष्ठ सीआरपीएफ अधिकारियों को सूचना दी गई और नीमच कैंटोनमेंट पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
एक परिजन ने आरोप लगाया,
“हमारी शिकायतें सिर्फ फाइलों में दबा दी गईं।”
44 दिनों बाद यह खुलासा कि जवान का कंकाल पूरे समय सीआरपीएफ परिसर के भीतर ही मौजूद था, प्रशासनिक लापरवाही और संभावित लीपापोती के आरोपों को और गंभीर बना रहा है।
भाई ने मौत को बताया संदिग्ध
मृतक के भाई ने नंदकिशोर की मौत को “अत्यंत संदिग्ध” बताते हुए आपराधिक गतिविधि की आशंका जताई है। उन्होंने निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार को उचित वित्तीय सहायता देने की भी मांग की है।
कैंटोनमेंट पुलिस की सफाई
कैंटोनमेंट पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी ने बताया कि गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी और भोपाल, उज्जैन, रतलाम और नागदा सहित कई स्थानों पर तलाश की गई। रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका।
पुलिस के अनुसार, जांच अभी जारी है। कंकाल को मंदसौर भेजा गया है, जहां पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के माध्यम से मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा।

