CRPF डीजी जीपी सिंह ने वीर बलिदानी इंस्पेक्टर कौशल कुमार मिश्रा के परिजनों से की मुलाकात, दिया सम्मान और भरोसा
CRPF के महानिदेशक (डीजी) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने सोमवार को बिहार के समस्तीपुर जिले के रहीमपुर रुदौली वार्ड संख्या-41 स्थित वीर बलिदानी इंस्पेक्टर कौशल कुमार मिश्रा के आवास पर पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने वीर बलिदानी के परिजनों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया और शहीद इंस्पेक्टर की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित किया।

सड़क मार्ग से समस्तीपुर पहुंचने पर सबसे पहले सर्किट हाउस में डीजी जीपी सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। यहां मिथिला प्रक्षेत्र की डीआईजी डॉ. स्वप्ना गौतम मेश्राम और समस्तीपुर के एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वे श्रद्धांजलि सभा स्थल पहुंचे, जहां स्थानीय विधायक, सदर एसडीओ दिलीप कुमार और एएसपी संजय कुमार पांडेय समेत कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए डीजी जीपी सिंह ने कहा कि समस्तीपुर की यह पुण्य भूमि गौरवशाली है, जहां वीर बलिदानी इंस्पेक्टर कौशल कुमार मिश्रा जैसे जांबाज अधिकारी ने जन्म लिया। उन्होंने बताया कि नक्सल विरोधी अभियान के दौरान वे गंभीर रूप से घायल हुए थे और उन्हें एयर एंबुलेंस के माध्यम से बेहतर इलाज के लिए राउरकेला, रांची और बाद में दिल्ली एम्स ले जाया गया। हरसंभव चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई गई, लेकिन दुर्भाग्यवश 30 अक्टूबर की सुबह उनका निधन हो गया और वे वीरगति को प्राप्त हुए।
डीजी ने कहा कि वे वीर बलिदानी अधिकारी के परिजनों को यह भरोसा देने आए हैं कि सीआरपीएफ हमेशा अपने शहीदों और उनके परिवारों के साथ खड़ी रहती है। उन्होंने कहा कि जवानों और अधिकारियों के बलिदान और कठिन परिश्रम के कारण ही आज नक्सलवाद समाप्ति की कगार पर है। वीर बलिदानी कौशल कुमार मिश्रा के बलिदान को न केवल सीआरपीएफ बल्कि पूरा देश नमन करता है।
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वीर बलिदानी के परिजनों को भविष्य में किसी भी प्रकार की आवश्यकता होने पर सीआरपीएफ हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी और उनका साथ हमेशा बना रहेगा।
गौरतलब है कि वीर बलिदानी इंस्पेक्टर कौशल कुमार मिश्रा 10 अक्टूबर को झारखंड के सारंडा क्षेत्र में जराईकेला थाना अंतर्गत समठा और बाबूडेरा के जंगलों में नक्सल विरोधी अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। इसी दौरान माओवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद इलाज के दौरान उनका बलिदान हो गया।

