8th CPC: CRPF ने बनाया विशेष बोर्ड, जवानों के वेतन-भत्तों की करेगा पैरवी ,आठवें वेतन आयोग तक पहुंचाएगा सुझाव
केंद्र सरकार द्वारा कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य आर्थिक लाभों में बदलाव के लिए आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) का गठन किए जाने के बाद अब केंद्रीय अर्धसैनिक बलों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने अपने जवानों और अधिकारियों के आर्थिक हितों की मजबूती से पैरवी करने के लिए एक सात सदस्यीय विशेष बोर्ड का गठन किया है। यह बोर्ड केंद्रीय गृह मंत्रालय के माध्यम से अपने सुझाव सीधे आठवें वेतन आयोग तक पहुंचाएगा।
उल्लेखनीय है कि जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित आठवां वेतन आयोग आगामी 18 महीनों में अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा। इससे पहले ही विभिन्न कर्मचारी संगठनों और नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) की ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (JCM) ने अपने सुझाव आयोग को भेज दिए हैं।
एडीजी संदीप खिरवार की अध्यक्षता में गठित बोर्ड
सीआरपीएफ ने 2 जनवरी को यह बोर्ड गठित किया, जिसकी अध्यक्षता एडीजी (हेडक्वार्टर) संदीप खिरवार कर रहे हैं। बोर्ड में
- आईजी (पर्स) मितेश जैन,
- डीआईजी किशोर प्रसाद (रेंज नई दिल्ली),
- डीआईजी पदम कुमार (रेंज बंगलुरु),
- कमांडेंट वाई.एन. राय (128 बटालियन),
- रमेश कुमार (ग्रुप सेंटर जमशेदपुर),
- अभिषेक सिंह (डीएफए, महानिदेशालय) और
- संदीप सिंह पंवार (टूआईसी)
को सदस्य बनाया गया है।
इसके अलावा बोर्ड में असिस्टेंट कमांडेंट (मिनिस्ट्रियल), इंस्पेक्टर (मिनिस्ट्रियल), इंस्पेक्टर स्टेनो, सब-इंस्पेक्टर (मिनिस्ट्रियल), हवलदार जीडी तथा दो सिपाही (रनर ड्यूटी) को भी शामिल किया गया है, ताकि जमीनी स्तर की समस्याएं सीधे सामने आ सकें।
जोखिम भरे क्षेत्रों की चुनौतियां होंगी प्रमुख मुद्दा
सीआरपीएफ देश का वह अर्धसैनिक बल है जिसकी सबसे अधिक तैनाती आंतरिक सुरक्षा मोर्चे पर रहती है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान हों, उत्तर-पूर्व में उग्रवाद या फिर नक्सल प्रभावित इलाके—हर जगह सीआरपीएफ की अहम भूमिका रही है।
अधिकारियों के अनुसार, नक्सल प्रभावित क्षेत्र सबसे अधिक जोखिम वाले हैं और 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने में सीआरपीएफ और उसकी विशेष इकाई कोबरा का बड़ा योगदान रहा है।
बोर्ड की रिपोर्ट में इन सभी जोखिम भरे क्षेत्रों की भौगोलिक, सामाजिक और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियों का विस्तार से उल्लेख किया जाएगा। जैसे—
- दुर्गम इलाकों तक पहुंचने के साधन,
- सड़कों की स्थिति,
- स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी,
- लंबे समय तक परिवार से दूर रहकर ड्यूटी करने की मजबूरी।
वेतन, भत्ते और पदोन्नति से जुड़े मुद्दे
बोर्ड की सिफारिशों में वेतन एवं भत्तों का ढांचा, जोखिम भत्ता, एचआरए, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य वित्तीय सुविधाएं प्रमुख रूप से शामिल होंगी। साथ ही लंबे समय से लंबित कैडर रिव्यू का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया जाएगा, जिसके कारण अधिकारी और जवान पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़ रहे हैं।
सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक के कार्मिकों को पदोन्नति के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ रहा है। इसके अलावा
- ऑर्गनाइज्ड ग्रुप ‘ए’ सर्विस (OGAS),
- नॉन-फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (NFFU)
- पुरानी पेंशन (OPS)
जैसे मामले अदालतों में लंबित हैं, जिन्हें लेकर भी बोर्ड आठवें वेतन आयोग को ठोस सुझाव देगा।
2008 के वित्त मंत्रालय के ओएम का मुद्दा भी शामिल
वित्त मंत्रालय द्वारा वर्ष 2008 में जारी कार्यालय ज्ञापन (OM) में यह प्रावधान था कि 4800 ग्रेड पे में चार साल की सेवा पूरी करने पर 5400 ग्रेड पे दिया जाएगा। हालांकि यह व्यवस्था केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में स्वतः लागू नहीं होती और इंस्पेक्टरों को इसके लिए अदालत का सहारा लेना पड़ता है। इस तरह के मुद्दे भी बोर्ड की सिफारिशों में शामिल किए जा सकते हैं।
जवानों को आठवें वेतन आयोग से बड़ी उम्मीद
सीआरपीएफ द्वारा गठित यह बोर्ड न केवल जवानों की आर्थिक समस्याओं को सामने लाएगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि आठवां वेतन आयोग जोखिम भरी ड्यूटी करने वाले अर्धसैनिक बलों को विशेष तवज्जो दे। इससे आने वाले समय में सीआरपीएफ के जवानों और अधिकारियों को बेहतर वेतन, भत्ते और सुविधाएं मिलने की उम्मीद की जा रही है।

