CAPF में रिवार्ड नीति बदली, DG की शक्तियां बढ़ीं, IG–कमांडेंट पर लिमिट
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों—असम राइफल्स, बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एनएसजी और एसएसबी—में रिवार्ड (इनाम) देने से जुड़ी वित्तीय शक्तियों में अहम बदलाव किया है। नए आदेशों के तहत बलों के महानिदेशकों (डीजी) की रिवार्ड मंजूरी की सीमा बढ़ा दी गई है, जबकि आईजी, डीआईजी और कमांडेंट स्तर के अधिकारियों के लिए पहली बार वार्षिक सीमा तय की गई है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ‘पुलिस-2’ डिवीजन द्वारा 19 दिसंबर को जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, अब महानिदेशक प्रत्येक केस में 12 हजार रुपये तक का रिवार्ड मंजूर कर सकेंगे। पहले यह सीमा 10 हजार रुपये थी। इसके साथ ही डीजी के लिए वार्षिक रिवार्ड सीमा भी ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख रुपये कर दी गई है।
एसडीजी/एडीजी और आईजी की शक्तियों में बदलाव
नए आदेशों में डीजी और एसडीजी/एडीजी की वित्तीय शक्तियों में अंतर किया गया है। अब एसडीजी/एडीजी प्रत्येक केस में अधिकतम 10 हजार रुपये का रिवार्ड दे सकेंगे। हालांकि, उनकी वार्षिक सीमा पहले की ढाई लाख रुपये से घटाकर एक लाख रुपये कर दी गई है।
आईजी स्तर के अधिकारियों को पहले प्रत्येक केस में 2,500 रुपये तक का रिवार्ड देने की अनुमति थी और इस पर कोई वार्षिक सीमा नहीं थी। अब उनकी वार्षिक सीमा 50 हजार रुपये तय कर दी गई है।
डीआईजी और कमांडेंट के लिए भी सीलिंग
डीआईजी पहले प्रत्येक केस में 500 रुपये तक का रिवार्ड बिना किसी वार्षिक सीमा के दे सकते थे। नए आदेशों के तहत यह राशि बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रति केस कर दी गई है, लेकिन अब वार्षिक सीमा 30 हजार रुपये निर्धारित की गई है।
इसी तरह, कमांडेंट स्तर के अधिकारी पहले 300 रुपये तक का रिवार्ड जारी कर सकते थे और कोई सालाना सीमा नहीं थी। अब प्रति केस रिवार्ड राशि 500 रुपये कर दी गई है, जबकि वार्षिक सीमा 20 हजार रुपये तय की गई है।
उद्देश्य: पारदर्शिता और संतुलन
गृह मंत्रालय के अनुसार, इन बदलावों का उद्देश्य रिवार्ड प्रणाली में अधिक पारदर्शिता लाना और विभिन्न स्तरों पर वित्तीय अधिकारों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है। नई व्यवस्था से शीर्ष अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ेगी, वहीं निचले स्तर पर रिवार्ड वितरण को एक तय सीमा में रखा जा सकेगा।
(SOURCE – AMAR UJALA)

