CAPF में पदोन्नति ठहराव पर संसदीय समिति ने जताई गहरी चिंता, जवानों के मनोबल पर पड़ सकता है बुरा असर
नई दिल्ली: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में लंबे समय से पर्यवेक्षी स्तरों पर जारी पदोन्नति के ठहराव को लेकर संसद की स्थायी समिति ने गहरी चिंता जताई है। मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में पेश अपनी रिपोर्ट में समिति ने चेतावनी दी कि पदोन्नति में देरी से जवानों के मनोबल और करियर प्रगति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
गृह मामलों की स्थायी समिति, जिसकी अध्यक्षता भाजपा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल कर रहे हैं, ने सुझाव दिया है कि सभी रैंकों में रिक्त पदों, पदोन्नति के अवसरों और समयसीमा की व्यापक समीक्षा के लिए एक ‘समग्र कैडर रिव्यू’ कराया जाए।
करियर प्रगति में समानता और पारदर्शिता पर जोर
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सीएपीएफ के विभिन्न बलों के अधिकारियों के बीच करियर प्रगति में समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। इसके लिए पदोन्नति कोटा का युक्तिकरण, विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) की समय पर बैठकें और कैडर संरचना की नियमित समीक्षा जैसे कदम उठाने की सिफारिश की गई है।
CISF में पदोन्नति देरी पर विशेष चिंता
रिपोर्ट में विशेष रूप से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इंस्पेक्टर (ग्रुप ‘बी’) से सहायक कमांडेंट (ग्रुप ‘ए’) के पद पर पदोन्नति में अत्यधिक देरी हो रही है, जिससे अधिकारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
एलडीसीई परीक्षा का सुझाव
समिति ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह भी सिफारिश की है कि अन्य सीएपीएफ बलों में सहायक कमांडेंट के पद पर पदोन्नति हेतु सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (LDCE) का आयोजन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के माध्यम से किया जाए।
समयबद्ध कार्यान्वयन पर जोर
हालांकि कुछ बलों में अतिरिक्त पदों के सृजन और रैंक संरचना के युक्तिकरण जैसे कदम उठाए गए हैं, समिति ने पाया कि कई सुधार प्रक्रियाएं अभी भी लंबित हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भर्ती नियमों की समय पर मंजूरी और नए प्रतिष्ठानों के गठन में तेजी लाना बेहद आवश्यक है।
समिति का मानना है कि इन सिफारिशों का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन ही सीएपीएफ की कार्यक्षमता को मजबूत करेगा और जवानों के मनोबल को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा।

