NEWS OF PARAMILITARY (CAPF)

देशभक्ति और सूचना का सशक्त मंच

NEWS OF PARAMILITARY (CAPF)

देशभक्ति और सूचना का सशक्त मंच

CAPF NEWS

CAPF में पदोन्नति का संकट: एक IPS की प्रतिनियुक्ति रोकती है 15 से ज्यादा प्रमोशन, पूर्व अधिकारी का बड़ा दावा

नई दिल्ली: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में पदोन्नति (Promotion) को लेकर एक नया और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। आईटीबीपी और भारतीय नौसेना में 27 वर्षों तक सेवा दे चुके पूर्व अधिकारी तरुण कुमार बंजारी ने सनसनीखेज दावा किया है कि अर्धसैनिक बलों में एक IPS अधिकारी की प्रतिनियुक्ति केवल एक पद नहीं भरती, बल्कि नीचे के रैंकों तक 15 से अधिक पदोन्नतियों के रास्ते बंद कर देती है।

​यह मुद्दा ऐसे समय में गरमाया है जब ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026’ चर्चा में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधेयक राहत देने के बजाय समस्या को कानूनी रूप से और जटिल बना सकता है।

​सिपाही तक पहुँचता है पदोन्नति अवरोध का असर

​तरुण कुमार बंजारी, जो यूपीएससी सीपीएफ 2004 बैच के सेवानिवृत्त राजपत्रित अधिकारी हैं, का कहना है कि पदोन्नति का यह ठहराव केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं है। उन्होंने समझाया कि सीएपीएफ में पदोन्नति प्रणाली एक ‘सीढ़ी’ (Chain Reaction) की तरह काम करती है।

​”जब शीर्ष पर एक पद किसी बाहरी (IPS) अधिकारी द्वारा भरा जाता है, तो पूरी श्रृंखला बाधित हो जाती है। जो आईजी बन सकता था वह डीआईजी रह जाता है, और यह असर अंततः उस सिपाही तक पहुँचता है जो सीमा पर तैनात है लेकिन हेड कांस्टेबल नहीं बन पाता क्योंकि उसके ऊपर के पद खाली नहीं हुए।”

विधेयक 2026′ में बड़ा कानूनी पेंच

​प्रस्तावित विधेयक में डीआईजी स्तर पर IPS कोटा को 20% से घटाकर 0% करने का प्रस्ताव है, जिसे एक राहत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, बंजारी ने इसके एक ‘घातक दोष’ की ओर इशारा किया है:

  • आईजी स्तर पर आरक्षण: वर्तमान में आईजी स्तर पर IPS के लिए 50% आरक्षण एक कार्यकारी आदेश है।
  • स्थायी कानून: नया विधेयक इस 50% आरक्षण को कानून में स्थायी रूप से ‘लॉक’ कर देगा। इसे बदलने के लिए फिर संसद के नए अधिनियम की आवश्यकता होगी।
  • न्यायालय की अवहेलना: दावा है कि न्यायालय ने इस कोटे को हटाने या कम करने का संकेत दिया था, जबकि विधेयक इसे कानूनी जामा पहना रहा है।

​आंकड़ों का गणित: कैसे रुकती हैं 15 पदोन्नतियाँ?

​लेख के अनुसार, यदि आईजी स्तर पर 2 IPS नियुक्त होते हैं, तो उसका प्रभाव 10 अलग-अलग रैंकों पर पड़ता है:

  • ​2 कैडर अधिकारी आईजी नहीं बन पाते।
  • ​इसके परिणामस्वरूप 2 डीआईजी, 2 कमांडेंट, 2 टूआईसी और 2 डिप्टी कमांडेंट के प्रमोशन रुक जाते हैं।
  • ​नीचे के स्तर पर कंपनी कमांडर, निरीक्षक, उप-निरीक्षक और यहाँ तक कि कांस्टेबल के पदोन्नति के अवसर भी समाप्त हो जाते हैं।
  • ​कुल मिलाकर, मात्र दो आईजी नियुक्तियाँ 15 से अधिक कर्मियों के भविष्य को प्रभावित करती हैं।

कैडर बनाम IPS: अनुभव और समय का बड़ा अंतर

​रिपोर्ट में चौंकाने वाले तुलनात्मक आंकड़े पेश किए गए हैं:

  1. समय का अंतर: एक IPS अधिकारी लगभग 18 साल में आईजी बन जाता है, जबकि एक सीएपीएफ कैडर अधिकारी को उसी पद तक पहुँचने में 31 से 33 साल लग जाते हैं।
  2. पदोन्नति का ठहराव: सीआरपीएफ या बीएसएफ के 2010 बैच के सहायक कमांडेंट 16 साल बाद भी उप-कमांडेंट नहीं बन पाए हैं, जबकि 2012 बैच के IPS सीधे डीआईजी रैंक पर आ रहे हैं।
  3. एडीजी स्तर की स्थिति: बीएसएफ में सभी स्वीकृत एडीजी पद IPS के पास हैं, जबकि 1987 बैच के वरिष्ठ कैडर अधिकारी अभी भी आईजी पद पर ही अटके हुए हैं।

​मनोबल पर गहरा प्रभाव

​पूर्व अधिकारी का तर्क है कि यह केवल पद का सवाल नहीं है, बल्कि यह जवानों के मनोबल और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। जब पदोन्नति की पाइपलाइन ऊपर से बंद होती है, तो नीचे तैनात जवानों में निराशा बढ़ती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है।

Spread the love

Editorial Desk – News of Paramilitary

Editorial Desk, News of Paramilitary, covers verified news, policy updates and field reports related to India’s Paramilitary Forces. Content is published following strict editorial standards.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page