CAPF पुरानी पेंशन मामला: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, जानें 9 अप्रैल के आदेश में क्या हुआ और क्या है अगली तैयारी
नई दिल्ली: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के जवानों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने की कानूनी लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रही है। 9 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्रार सुश्री सुजाता सिंह की अदालत में इस मामले से जुड़ी विभिन्न अपीलों पर सुनवाई हुई।
इस सुनवाई का मुख्य उद्देश्य सुनवाई की औपचारिकताओं को पूरा करना और मामले को अंतिम सुनवाई (Final Hearing) के लिए माननीय न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने की तैयारी करना था।
सुनवाई की मुख्य बातें: किस केस में क्या हुआ?
अदालत ने चार मुख्य सिविल अपीलों पर स्थिति स्पष्ट की है:
- Civil Appeal No. 9635/2024: इस मामले में प्रतिवादी संख्या 1 से 45 द्वारा जवाबी हलफनामा (Counter Affidavit) पहले ही दाखिल किया जा चुका है। रजिस्ट्रार ने निर्देश दिया है कि अब इस मामले को नियमों के अनुसार माननीय न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू करे।
- Civil Appeal No. 9636/2024: यहाँ प्रतिवादी को नोटिस तामील (Service) हो चुका है, लेकिन उनकी ओर से कोई पेश नहीं हुआ। इसे भी अब अगली सुनवाई के लिए कोर्ट के समक्ष भेजने का आदेश दिया गया है।
- Civil Appeal No. 9637/2024: इस केस में 100 से अधिक प्रतिवादी हैं, जिनमें से अधिकांश ने अपने हलफनामे दाखिल कर दिए हैं। विशेष रूप से, प्रतिवादी संख्या 74 को 17 मार्च 2026 के अदालती आदेश के बाद पक्षकारों की सूची से हटा दिया गया है। यह मामला भी अब अंतिम सुनवाई के लिए तैयार है।
- Civil Appeal No. 9638/2024: इस मामले में अभी कुछ औपचारिकताएं बाकी हैं। प्रतिवादी संख्या 5 को नोटिस की रिपोर्ट का इंतजार है, जबकि कुछ अन्य प्रतिवादी नोटिस मिलने के बावजूद पेश नहीं हुए हैं।
आगे क्या होगा?
इस आदेश के बाद अब CAPF के जवानों की निगाहें अगली तारीखों पर टिकी हैं:
- अगली तारीख: सिविल अपील संख्या 9638/2024 के लिए अगली सुनवाई 08 मई 2026 को तय की गई है।
- मुख्य पीठ के समक्ष सुनवाई: जिन अपीलों (जैसे 9635, 9636 और 9637) में कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है, उन्हें अब सीधे ‘माननीय न्यायालय’ (Hon’ble Court) के समक्ष बहस के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
अंतिम फैसला: क्योंकि रजिस्ट्रार कोर्ट ने मामले को ‘प्रि-फाइनल हियरिंग’ (Pre-final hearing) के स्तर पर रखा था, इसका मतलब है कि जल्द ही सुप्रीम कोर्ट की मुख्य बेंच इन सभी अपीलों पर एक साथ विस्तृत सुनवाई कर सकती है, जिससे लाखों जवानों के भविष्य का फैसला होगा।
9 अप्रैल की कार्यवाही से यह साफ है कि कानूनी प्रक्रिया अब तेजी पकड़ रही है। सरकार और जवानों के वकीलों के बीच दस्तावेजों का आदान-प्रदान लगभग पूरा हो चुका है, जो इस लंबे समय से लंबित न्याय की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।



