CAPF OPS केस: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 19 जनवरी को सुनवाई क्यों नहीं हुई? अब इस केस में आगे क्या होगा?
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के लाखों जवानों से जुड़ा पुरानी पेंशन योजना (OPS) का अहम मामला सोमवार को भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सका। हैरानी की बात यह रही कि 05 दिसंबर 2025 के आदेश में साफ तौर पर केस को 19 जनवरी 2026 को Registrar Court में सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद न तो मामला Cause List में शामिल हुआ और न ही कोई सुनवाई हो सकी
क्या था 05 दिसंबर 2025 का आदेश
सुप्रीम कोर्ट के Registrar Court द्वारा पारित आदेश में कहा गया था कि यदि यूनियन ऑफ इंडिया (गृह मंत्रालय) द्वारा प्रतिवादी संख्या 74 को हटाने से संबंधित आवेदन 12 दिसंबर 2025 तक दाखिल नहीं किया जाता, तो अंतिम अवसर देते हुए मामले को 19 जनवरी 2026 को सूचीबद्ध किया जाएगा
Registrar सुजाता सिंह द्वारा जारी रिकॉर्ड ऑफ प्रोसीडिंग्स में यह भी दर्ज है कि अधिकांश प्रतिवादियों की ओर से काउंटर एफिडेविट पहले ही दाखिल की जा चुकी है और केवल प्रक्रियात्मक औपचारिकताएँ शेष थीं।
फिर 19 जनवरी को केस Cause List में क्यों नहीं आया?
कानूनी जानकारों के अनुसार, इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं—
- प्रक्रियात्मक आवेदन लंबित होना
यदि प्रतिवादी संख्या 74 को हटाने से जुड़ा आवेदन समय पर दाखिल हुआ हो, तो वह मामला पहले चैंबर जज के समक्ष जाने की प्रक्रिया में हो सकता है, जिस कारण मुख्य केस की लिस्टिंग रोक दी गई। - Registrar Court में प्रशासनिक देरी
सुप्रीम कोर्ट में बड़ी संख्या में मामलों के चलते कई बार तय तारीख के बावजूद केस अगली Cause List में स्वतः शामिल नहीं हो पाते। - Service या दस्तावेज़ों से जुड़ी तकनीकी कमी
यदि किसी पक्ष की ओर से सेवा (Service of Notice) या दस्तावेज़ों में कोई कमी पाई गई हो, तो Registrar Court लिस्टिंग आगे बढ़ा देता है।
अब इस केस में आगे क्या होगा?
कानूनी प्रक्रिया के अनुसार—
- Registrar Court द्वारा नई तारीख तय की जाएगी,
- या फिर संबंधित वकील (AOR) द्वारा Mentioning कर जल्द सुनवाई की मांग की जा सकती है,
- मामला पुनः Registrar Court में सूचीबद्ध होकर आगे मुख्य पीठ (Hon’ble Bench) के समक्ष भेजा जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह देरी मामले के गुण-दोष (Merits) से जुड़ी नहीं है, बल्कि पूरी तरह प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक है।
यह स्पष्ट है कि—
- केस न तो खारिज हुआ है और न ही खत्म,
- केवल सुनवाई की तारीख आगे बढ़ी है,
- OPS को लेकर न्यायिक लड़ाई अब भी जारी है।
CAPF जवानों और उनके परिवारों को अफवाहों से बचते हुए केवल आधिकारिक कोर्ट रिकॉर्ड और विश्वसनीय स्रोतों पर भरोसा करने की सलाह दी जा रही है।
19 जनवरी 2026 को सुनवाई न होना भले ही निराशाजनक लगे, लेकिन यह मामला अभी पूरी तरह जीवित है। सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया के तहत जल्द ही अगली तारीख सामने आने की संभावना है। पुरानी पेंशन को लेकर अंतिम फैसला अब भी कोर्ट के विचाराधीन है।

