CAPF OPS मामला: एक और तारीख मिली, लेकिन अंतिम फैसले के लिए जवान कब तक करेंगे इंतजार? सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 05 दिसंबर, 2025 को तय की
सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) के जवानों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने के बहुचर्चित मामले में कानूनी प्रक्रिया धीमी गति से आगे बढ़ रही है। 03 नवंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्रार कोर्ट में हुई सुनवाई से यह स्पष्ट हो गया कि अंतिम निर्णय आने में अभी और समय लगेगा।
यह मामला, जिसका शीर्षक यूनियन ऑफ इंडिया बनाम मनपाल सिंह और अन्य (सिविल अपील संख्या 9637/2024) है, प्रक्रियात्मक देरी के कारण एक बार फिर आगे बढ़ा दिया गया है।
⚖️ 03 नवंबर की सुनवाई में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार श्रीमती सुजाता सिंह की कोर्ट में हुई सुनवाई में मामले के गुण-दोष (merits) पर कोई फैसला नहीं लिया गया। रजिस्ट्रार कोर्ट का काम यह सुनिश्चित करना होता है कि मामला जजों की मुख्य पीठ के सामने सुनवाई के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाए।
- विलंब का कारण: कोर्ट ने पाया कि अपीलकर्ता (केंद्र सरकार/गृह मंत्रालय) की ओर से प्रतिवादी संख्या 74 को नोटिस भेजने की आवश्यक कार्रवाई (Fresh Particulars for Service) अभी तक पूरी नहीं की गई है।
- प्रक्रियात्मक आदेश: रजिस्ट्रार कोर्ट ने अपीलकर्ता के वकील को इस कमी को दूर करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
- अगली तारीख: अब इस मामले को अगली प्रक्रियागत सुनवाई के लिए 05 दिसंबर, 2025 को सूचीबद्ध किया गया है।
❓ आखिर कब तक मिलेगी पुरानी पेंशन?
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में CAPF को संघ के सशस्त्र बलों का हिस्सा मानते हुए उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का निर्देश दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील पर उस फैसले पर रोक लगा दी है।
मौजूदा आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है:
- कब तक पूरी होगी कोर्ट की कार्यवाही?
- 05 दिसंबर, 2025 की सुनवाई में यदि प्रतिवादी संख्या 74 पर सर्विस पूरी हो जाती है, तो रजिस्ट्रार कोर्ट इस मामले को अंतिम सुनवाई के लिए जजों की पीठ के सामने भेजने का आदेश देगी।
- हालांकि, मुख्य पीठ के समक्ष भी अंतिम बहस शुरू होने और फैसला आने में अक्सर कई महीने लग जाते हैं।
- CAPF जवानों को कितना इंतजार करना पड़ेगा?
- कोर्ट के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि मुख्य मामले की सुनवाई शुरू होने से पहले ही इस तरह की छोटी प्रक्रियागत कमियां (Procedural Hurdles) समय लेती हैं। जब तक सभी पक्षकारों को विधिवत नोटिस नहीं मिल जाता, तब तक मामला आगे नहीं बढ़ सकता।
- चूंकि यह मामला लाखों जवानों के भविष्य और सरकारी खजाने पर बड़े वित्तीय प्रभाव से जुड़ा है, इसलिए इसकी सुनवाई लंबी चलने की संभावना है। जवानों को निर्णायक कानूनी जीत के बावजूद अपने हक के लिए अनिश्चित काल तक इंतजार करना पड़ सकता है, जैसा कि अतीत के कई बड़े सरकारी मामलों में देखा गया है।
जवानों और उनके परिवारों की उम्मीदें अब 05 दिसंबर, 2025 की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि क्या मामला मुख्य सुनवाई के लिए आगे बढ़ पाएगा या नहीं।

