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क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट के OGAS के फैसले पर लाएगी ‘बिल’ ? केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कैडर अफसरों में बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) के कैडर अधिकारियों को पदोन्नति और अन्य आर्थिक हितों के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय से मिली बड़ी राहत के बाद अब केंद्र सरकार के संभावित कदमों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार संसद में ‘बिल’ लाकर मई 2025 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अप्रभावी करने की तैयारी में है।

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को ‘संगठित समूह ए सेवा’ (OGAS) का दर्जा प्रभावी रूप से लागू करने और छह माह के भीतर कैडर रिव्यू करने का निर्देश दिया था। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि केवल एनएफएफयू (नॉन-फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन) तक सीमित न रहकर, सभी कार्यों और पदोन्नतियों में OGAS पैटर्न लागू किया जाए।

साथ ही कोर्ट ने ‘एसएजी’ (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) स्तर तक के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को दो वर्ष में चरणबद्ध तरीके से कम करने के निर्देश भी दिए थे। अदालत का मानना था कि आईपीएस प्रतिनियुक्ति के कारण सीएपीएफ के कैडर अधिकारी नेतृत्व और पदोन्नति के अवसरों से वंचित रह जाते हैं।

रिव्यू पिटीशन खारिज, अवमानना याचिका दायर

सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बावजूद छह माह की निर्धारित अवधि समाप्त होने तक कैडर रिव्यू की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।

इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने केंद्रीय गृह सचिव के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की। 10 फरवरी को जस्टिस बी.वी. नागारत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया। अदालत ने फिलहाल प्रतिवादी पक्ष को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी है, साथ ही अवमानना याचिका में अन्य नाम जोड़ने की अनुमति भी प्रदान की है।

आईपीएस प्रतिनियुक्ति में बढ़ोतरी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत, पिछले छह महीनों में केंद्र में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति में वृद्धि दर्ज की गई है। जून 2025 में जहां 678 आईपीएस अधिकारी केंद्र में तैनात थे, वहीं अब यह संख्या 700 के पार पहुंच गई है।

23 दिसंबर 2025 को आईपीएस प्रतिनियुक्ति के स्वीकृत पदों की संख्या भी बढ़ाई गई। वर्तमान में केंद्र में डीजी के 15, एसडीजी के 17, एडीजी के 30, आईजी के 158, डीआईजी के 256 और एसपी के 225 पद स्वीकृत हैं।

कैडर अधिकारियों में असंतोष

सीएपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति की रफ्तार बेहद धीमी है। पूर्व एडीजी एस.के. सूद के अनुसार, सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ और अन्य केंद्रीय बलों में कैडर अफसरों को 15 वर्षों में पहली पदोन्नति तक नहीं मिल पा रही। इस स्थिति में अधिकांश अधिकारी कमांडेंट पद से ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं और सैकड़ों में से केवल कुछ ही एडीजी स्तर तक पहुंच पाते हैं।

आगे क्या?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार संसद में विधेयक लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी करने का प्रयास करती है, तो यह मामला एक बार फिर न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकता है।

फिलहाल, सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों की निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम और सुप्रीम कोर्ट में चल रही अवमानना कार्यवाही पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार न्यायालय के निर्देशों का पालन करती है या विधायी रास्ता अपनाकर नई बहस को जन्म देती है।

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