राज्यसभा में उठा CAPF अधिकारियों के प्रमोशन का मुद्दा,सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश लागू न करने का आरोप
नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव ने गुरुवार (12 मार्च 2026) को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के अधिकारियों की पदोन्नति में हो रही देरी का मुद्दा राज्यसभा में जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले CAPF अधिकारियों को अपने पहले प्रमोशन के लिए 10 से 15 साल तक इंतजार करना पड़ता है, जो बेहद निराशाजनक स्थिति है।
राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान इस विषय को उठाते हुए यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह मई 2025 में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अब तक लागू नहीं कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने CAPF अधिकारियों को Organised Group A Services (OGAS) का दर्जा देने और CAPF में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था।
राम गोपाल यादव ने कहा, “करीब 13 हजार CAPF अधिकारी सरकार से अपने अधिकारों की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन सरकार उन्हें उनका हक नहीं दे रही है। यह उनके मनोबल को तोड़ने वाला है।”
सेवा शर्तों पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि CAPF अधिकारी संसद, सीमाओं, औद्योगिक इकाइयों और हवाई अड्डों की सुरक्षा करते हैं और कई अधिकारी ड्यूटी के दौरान अपनी जान भी गंवा देते हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तें इतनी कठिन हैं कि उन्हें डिप्टी कमांडेंट बनने के लिए 10 से 15 साल तक इंतजार करना पड़ता है।
यादव ने बताया कि CAPF अधिकारियों को अपने अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा था। अदालत ने पिछले वर्ष फैसला देते हुए कहा था कि CAPF के ग्रुप-A अधिकारियों को 1986 से संगठित सेवा (Organised Service) का दर्जा दिया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उसे भी खारिज कर दिया। इसके बावजूद आदेश लागू नहीं किया गया, जिसके कारण अधिकारियों को अदालत में अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ी।
कैबिनेट ने बिल को दी मंजूरी
इस बीच 10 मार्च को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Central Armed Police Forces (General Administration) Bill को मंजूरी दे दी है। यह विधेयक संसद के मौजूदा बजट सत्र में पेश किया जा सकता है।
सरकार का कहना है कि यह बिल CAPF के प्रशासनिक ढांचे और कार्यप्रणाली को स्पष्ट रूप से कानून में शामिल करने के लिए लाया जा रहा है। यह सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद आया है जिसमें गृह मंत्रालय को अगले दो वर्षों में CAPF में Inspector General रैंक तक IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को चरणबद्ध तरीके से कम करने का निर्देश दिया गया था।

