कैबिनेट ने CAPF में IG-DIG स्तर पर IPS प्रतिनियुक्ति बनाए रखने वाले बिल को दी मंजूरी,क्या यह बिल सुप्रीम कोर्ट के OGAS फैसले को पलटने की तैयारी है?
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को Central Armed Police Forces (General Administration) Bill के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है।
इस बिल के जरिए Inspector General (IG) और Deputy Inspector General (DIG) स्तर पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को कानून में शामिल करने की तैयारी है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने CAPF के ग्रुप-A अधिकारियों को “Organised Group-A Services (OGAS)” का दर्जा देते हुए सरकार को निर्देश दिया था कि IG रैंक तक के पदों पर IPS प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम किया जाए।
क्या है मौजूदा व्यवस्था
वर्तमान भर्ती नियमों के अनुसार:
- DIG स्तर के 20% पद IPS प्रतिनियुक्ति के लिए आरक्षित हैं
- IG स्तर के 50% पद IPS अधिकारियों के लिए रखे गए हैं
करीब 13,000 CAPF कैडर अधिकारियों का लंबे समय से आरोप रहा है कि वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की तैनाती के कारण उन्हें पदोन्नति और नेतृत्व के अवसर नहीं मिलते।
कोर्ट के फैसले के बाद भी नई पहल
सरकार ने पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर की थी, जिसे अक्टूबर 2025 में खारिज कर दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अवमानना याचिका भी दाखिल की है, जिसकी सुनवाई जारी है।
इसी बीच सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि CAPF के ग्रुप-A कैडर की व्यापक समीक्षा के लिए उसे एक साल का समय चाहिए, क्योंकि यह प्रक्रिया लंबी और जटिल है।
CAPF अधिकारियों में नाराज़गी
CAPF के कई अधिकारी इस प्रस्तावित कानून को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी करने की कोशिश मान रहे हैं। उनका कहना है कि नियमों को बदलने के बजाय अब कानून में ही IPS प्रतिनियुक्ति का प्रावधान जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
बड़ा सवाल
अब शायद कोई यह नहीं पूछेगा कि—
देश को Naxal से मुक्ति दिलाने के लिए जंगलों में लड़ने वाले ग्राउंड कमांडरों को 15-15 साल तक पहली पदोन्नति क्यों नहीं मिलती?
उन्हें नेतृत्व का मौका कब मिलेगा?

