हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला: CAPF नीति राज्य ने नहीं अपनाई,हरियाणा में CAPF जवानों को ‘भूतपूर्व सैनिक’ का दर्जा न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में यह फैसला सुनाया कि हरियाणा राज्य बीएसएफ (BSF) जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के सेवानिवृत्त कर्मियों को ‘भूतपूर्व सैनिक (Ex-Servicemen)’ नहीं मानेगा, क्योंकि राज्य सरकार ने अभी तक केंद्र की CAPF नीति (2012) को औपचारिक रूप से अपनाया नहीं है।
हालांकि अदालत ने कहा कि यह राज्य सरकार की नीतिगत विवेक का विषय है, लेकिन यह फैसला अर्धसैनिक बलों के लाखों सेवानिवृत्त जवानों के हितों को झटका देने वाला माना जा रहा है, जो वर्षों से समान अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
🔹 समान योगदान, असमान मान्यता
BSF, CRPF, CISF, ITBP और SSB जैसे CAPF बल देश की आंतरिक सुरक्षा, सीमाओं की रक्षा और आतंकवाद-नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहे हैं। देश की सुरक्षा में उनका योगदान किसी भी दृष्टि से सशस्त्र सेनाओं (Defence Forces) से कम नहीं है।
इसके बावजूद, राज्य सरकारें उन्हें ‘भूतपूर्व सैनिक’ की श्रेणी में शामिल नहीं करतीं, जिससे उन्हें रोजगार, शिक्षा और पेंशन जैसी योजनाओं में समान लाभ नहीं मिल पाते।
🔹 मामला क्या था
बीएसएफ के सेवानिवृत्त कांस्टेबल सुरजभान ने हरियाणा पुलिस में ‘भूतपूर्व सैनिक’ श्रेणी के तहत आवेदन किया था। सभी चरण पास करने के बाद भी उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया।
मामला अदालत पहुँचा, जहाँ राज्य ने बताया कि उसने केंद्र की 2012 की नीति — जिसमें CAPF कर्मियों को ‘Ex-CAPF personnel’ का दर्जा दिया गया था — को अपनाया नहीं है।
🔹 CAPF कर्मियों की पुरानी मांग
अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त कर्मी वर्षों से यह मांग उठा रहे हैं कि उन्हें भी रक्षा बलों के ‘Ex-Servicemen’ के समान दर्जा और लाभ मिलें। गृह मंत्रालय ने 2012 में सभी राज्यों को यह नीति अपनाने की सिफारिश की थी, लेकिन अब तक कुछ ही राज्यों ने इसे लागू किया है।
🔹 आवश्यक है समान सम्मान और नीति
सुरक्षा में समान योगदान देने वाले जवानों के साथ नीति में भेदभाव कहीं से भी उचित नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारों को जल्द मिलकर इस विषय पर एक समान और न्यायसंगत नीति बनानी चाहिए, जिससे CAPF कर्मियों को भी वह मान-सम्मान और सुविधा मिल सके, जिसके वे हकदार हैं।

