लोकसभा से पास हुआ CAPF बिल 2026, विपक्ष ने उठाया 15 साल प्रमोशन फ्रीज का मुद्दा
नई दिल्ली: लोकसभा ने गुरुवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (General Administration) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। हालांकि, इस दौरान विपक्ष ने बिल का जोरदार विरोध करते हुए आरोप लगाया कि इससे अर्धसैनिक बलों के जवानों और अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होगा तथा इसे संसदीय समिति के पास भेजा जाना चाहिए था।
सरकार ने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि यह विधेयक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में सेवा नियमों, कैडर प्रबंधन और नियुक्ति प्रणाली में मौजूद विसंगतियों को दूर करने के लिए लाया गया है। सरकार का दावा है कि नए कानून से प्रशासनिक ढांचा मजबूत होगा और देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि समय के साथ CAPF की जिम्मेदारियां बढ़ी हैं, जिसके कारण सेवा नियमों में कई असमानताएं पैदा हो गई थीं। यह बिल एक “अम्ब्रेला स्ट्रक्चर” तैयार करेगा, जिससे इन समस्याओं का समाधान किया जा सकेगा।
विपक्ष ने हालांकि सरकार के दावों पर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि CAPF अधिकारियों को कई बार 15-15 वर्षों तक प्रमोशन नहीं मिल पाता, जिससे उनके आत्मसम्मान और मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि जवानों की वास्तविक समस्याओं को हल किए बिना केवल प्रशासनिक बदलाव पर्याप्त नहीं हैं।
सरकार ने विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए कहा कि CAPF बलों का मनोबल पूरी तरह मजबूत है और देश को नक्सलवाद व आतंकवाद से मुक्त कराने में इन बलों की अहम भूमिका रही है।
यह विधेयक पहले ही राज्यसभा से पारित हो चुका है और अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून का रूप लेगा। सरकार का मानना है कि नए प्रावधानों से CAPF के प्रशासनिक संचालन में एकरूपता आएगी, जबकि विपक्ष ने आशंका जताई है कि इससे पदोन्नति और सेवा संरचना से जुड़े विवाद और बढ़ सकते हैं।

