CAPF में नया कानून लागू होते ही IPS-DIG तैनाती पर विवाद, पूर्व अफसर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में
नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा ‘सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026’ लागू किए जाने के तुरंत बाद केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आईपीएस अधिकारियों की डीआईजी स्तर पर प्रतिनियुक्ति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद 9 अप्रैल से कानून लागू होते ही केंद्रीय बलों में दो आईपीएस अधिकारियों को डीआईजी पद पर नियुक्त कर दिया गया, जिस पर कैडर अधिकारियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
पूर्व कैडर अधिकारियों ने अब इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है।
कानून लागू होते ही IPS अधिकारियों की नियुक्ति
गृह मंत्रालय ने 10 अप्रैल को जारी आदेश में राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी आदर्श सिद्धू (2012 बैच) को प्रतिनियुक्ति पर बीएसएफ में डीआईजी नियुक्त किया। वहीं बिहार कैडर के दीपक बर्नवाल (2010 बैच) को एसएसबी में डीआईजी बनाया गया है। दोनों राज्यों को तत्काल प्रभाव से अधिकारियों को रिलीव करने के निर्देश दिए गए।
दिलचस्प बात यह रही कि राज्यसभा में विधेयक पेश होने से 24 घंटे पहले भी डीआईजी स्तर पर प्रतिनियुक्ति जारी रही। 24 मार्च को अंकित गोयल को बीएसएफ और नवीन चंद्र झा को आईटीबीपी में डीआईजी नियुक्त किया गया था।
नए कानून में डीआईजी प्रतिनियुक्ति का जिक्र नहीं
सीएपीएफ के नए कानून में डीआईजी स्तर पर आईपीएस प्रतिनियुक्ति का स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है।
- आईजी स्तर पर 50% पद आईपीएस प्रतिनियुक्ति
- एडीजी स्तर पर 67% प्रतिनियुक्ति
- स्पेशल डीजी और डीजी पदों पर 100% आईपीएस
जबकि पहले डीआईजी स्तर पर 20% पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित थे। सरकार ने संसद में कहा था कि अब सीधी भर्ती से आने वाले सहायक कमांडेंट अधिकारी डीआईजी तक पहुंच सकेंगे।
लेकिन नई नियुक्तियों के बाद कैडर अफसरों में भ्रम और असंतोष बढ़ गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से टकराव का आरोप
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के करीब 13 हजार कैडर अधिकारियों से जुड़े मामले में मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया था। अदालत ने सीएपीएफ अधिकारियों को ‘ऑर्गनाइज्ड ग्रुप-ए सर्विस’ (OGAS) का दर्जा लागू करने और आईपीएस प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था।
साथ ही छह महीने के भीतर कैडर रिव्यू करने और पदोन्नति ढांचे को सुधारने की समयसीमा भी तय की गई थी।
पूर्व अधिकारियों का आरोप है कि नया कानून सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना को पलट देता है।
कमांडेंट बनकर ही रिटायर होंगे अधिकारी”
पूर्व एडीजी बीएसएफ एस.के. सूद का कहना है कि वर्षों से कैडर रिव्यू नहीं होने के कारण अधिकारियों को समय पर पदोन्नति नहीं मिल रही। कई अधिकारियों को 15–16 साल तक पहली प्रमोशन का इंतजार करना पड़ता है।
उनके अनुसार:
- सहायक कमांडेंट → डिप्टी कमांडेंट → सेकेंड-इन-कमांड → कमांडेंट
- इसके बाद ही डीआईजी पद संभव
ऐसे में अधिकांश अधिकारी डीआईजी तक पहुंचने से पहले ही कमांडेंट पद पर सेवानिवृत्त हो सकते हैं।
सरकार पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश पलटने का आरोप
पूर्व अधिकारियों का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट ने आईजी स्तर तक आईपीएस प्रतिनियुक्ति कम करने और कैडर अधिकारियों को नेतृत्व भूमिकाएं देने की दिशा तय की थी। इससे पदोन्नति, अनुभव और नीति निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ती।
लेकिन नया अधिनियम बिना किसी कानूनी कमी को दूर किए अदालत के फैसले को प्रभावहीन कर देता है।
अब सुप्रीम कोर्ट की शरण
पूर्व कैडर अफसरों का कहना है कि नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि संसद सीधे न्यायालय के फैसले को रद्द नहीं कर सकती, बल्कि केवल कानूनी खामियां दूर कर सकती है।
इसी आधार पर अब सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 को चुनौती देने की तैयारी चल रही है।
अधिकारियों को उम्मीद है कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिला अधिकार फिर से बहाल होगा और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में पदोन्नति एवं नेतृत्व संरचना पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट ही करेगा।

