विधानसभा चुनाव: मतदान बूथों पर मतदाताओं की पहचान जांचेंगे BSF जवान, CCTV निगरानी भी बल के जिम्मे
देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए केंद्रीय सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया जा रहा है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने चुनाव ड्यूटी से संबंधित नए निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत मतदान केंद्रों पर तैनात जवान मतदाताओं के पहचान पत्रों की जांच करेंगे और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
बूथ पर BSF की विशेष जिम्मेदारी
जारी आदेश के अनुसार प्रत्येक मतदान केंद्र पर बीएसएफ के एक पुरुष और एक महिला जवान की तैनाती की जाएगी। इन जवानों का मुख्य कार्य मतदान के लिए आने वाले मतदाताओं के पहचान पत्रों की जांच करना होगा।
इसके अलावा मतदान केंद्रों पर लगे सीसीटीवी कैमरों का पूरा नियंत्रण भी बीएसएफ के जवानों के पास रहेगा। कैमरों की निगरानी के लिए अलग से जवान तैनात किए जाएंगे, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि कैमरे सही तरीके से काम कर रहे हैं और उनकी लाइव फीड लगातार मॉनिटर होती रहे।
अधिकारियों के तबादले के निर्देश
बीएसएफ मुख्यालय ने यह भी निर्देश दिया है कि इंस्पेक्टर और उससे ऊपर के रैंक के ऐसे अधिकारी, जिन्होंने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान इन राज्यों में ड्यूटी की थी, उन्हें तत्काल प्रभाव से बदला जाए।
संबंधित यूनिटों को ऐसे अधिकारियों की सूची तैयार कर जल्द से जल्द फ्रंटियर हेडक्वार्टर को भेजने के निर्देश दिए गए हैं ताकि निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।
ढाई से तीन लाख केंद्रीय बल तैनात
असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए बड़े पैमाने पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जा रही है। अनुमान के अनुसार लगभग ढाई से तीन लाख केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान चुनावी ड्यूटी में लगाए गए हैं। इनका उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
बीएसएफ के इन निर्देशों पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की पहचान जांचना पारंपरिक रूप से चुनाव आयोग के अधिकारियों का कार्य होता है, न कि अर्धसैनिक बलों का।
उन्होंने कहा कि बीएसएफ द्वारा सीसीटीवी निगरानी और बूथ स्तर पर नियंत्रण संबंधी आदेश चुनाव आयोग की निर्धारित भूमिका में हस्तक्षेप माना जा सकता है, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।

