अग्निवीरों को 50% कोटे के तहत CAPF में शामिल करने की तैयारी, CISF तैयार करेगा ब्लूप्रिंट
केंद्र सरकार के फैसले के तहत अग्निवीरों को सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) में शामिल किए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी कड़ी में सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) ने यह तय करने की कवायद शुरू कर दी है कि अग्निवीरों को फोर्स में किन-किन भूमिकाओं और ड्यूटी में तैनात किया जा सकता है।
सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने बताया कि अग्निवीरों के समुचित समायोजन के लिए एक विशेष कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी उन सेक्टर्स और जिम्मेदारियों की पहचान कर रही है, जहां अग्निवीरों की विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग किया जा सके। उन्होंने कहा कि कमेटी जल्द ही एक विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार करेगी, जिससे अग्निवीरों को CAPF में सुचारू रूप से शामिल किया जा सके।
DG रंजन ने कहा कि अग्निवीरों को CAPF में एक निश्चित प्रतिशत आरक्षण दिया जाना भारत सरकार की नीति का हिस्सा है। इसी के तहत यह भी विचार किया जा रहा है कि उन्हें किस प्रकार की ड्यूटी सौंपी जाए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय नौसेना से जुड़े अग्निवीर पोर्ट और तटीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अधिक अनुभवी होते हैं, जिसका लाभ CISF जैसे बल उठा सकते हैं।
यह बयान उन्होंने वंदे मातरम कोस्टल साइक्लोथॉन के दूसरे संस्करण के कर्टेन रेज़र कार्यक्रम के दौरान दिया। यह आयोजन CISF की एक पहल है, जिसका उद्देश्य तटीय सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना और समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
गौरतलब है कि रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2022 में अग्निपथ योजना की शुरुआत की थी, जिसके तहत पहले चरण में लगभग 46,000 अग्निवीरों की भर्ती की गई थी। यह पहला बैच इस साल के अंत तक अपना चार साल का कार्यकाल पूरा करेगा। योजना के अनुसार, इनमें से 25 प्रतिशत को लंबी अवधि की सेवा के लिए रखा जाएगा, जबकि शेष अग्निवीरों को सेवा से मुक्त किया जाएगा।
इस बीच, गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा हाल ही में जारी एक गजट नोटिफिकेशन में CAPF भर्ती में अग्निवीरों के लिए 50 प्रतिशत कोटा अनिवार्य किया गया है। यह पहले BSF में कांस्टेबल पद के लिए तय किए गए 10 प्रतिशत कोटे की तुलना में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
हालांकि, CISF महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि भर्ती नियमों और आरक्षण से जुड़ा अंतिम फैसला गृह मंत्रालय का विषय है। CISF की कमेटी अपनी सिफारिशें MHA को सौंपेगी, जिसके आधार पर अंतिम नीति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया अभी अंतिम चरण में नहीं है, इसलिए शर्तों और नियमों पर टिप्पणी करना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

