NEWS OF PARAMILITARY (CAPF)

देशभक्ति और सूचना का सशक्त मंच

NEWS OF PARAMILITARY (CAPF)

देशभक्ति और सूचना का सशक्त मंच

CISF NEWS

बिना दोषसिद्धि सिर्फ जेल जाने के आधार पर CISF कर्मी को सेवा से नहीं हटाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि किसी आपराधिक मामले में केवल गिरफ्तारी या जेल में रहने के आधार पर, बिना दोषसिद्धि के, किसी CISF कर्मी को सेवा से हटाया नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि मात्र कारावास को अनुशासनात्मक कार्रवाई या बर्खास्तगी का आधार बनाना न तो तथ्यात्मक रूप से सही है और न ही कानूनी रूप से टिकाऊ।

जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस राजीव भारती की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की विशेष अपील खारिज करते हुए सिंगल जज के आदेश को बरकरार रखा। सिंगल जज ने हत्या के एक मामले में आरोपित CISF के हेड कांस्टेबल की सेवा समाप्ति को रद्द कर दिया था।

क्या है पूरा मामला

मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता वर्ष 2019 में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 201 (साक्ष्य मिटाना) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज एफआईआर में आरोपी बनाया गया था। इस दौरान वह कुछ समय तक जेल में रहा। बाद में जमानत पर रिहा होने के बाद जब उसने ड्यूटी पर वापस लेने का अनुरोध किया, तो CISF नियम, 2001 के तहत उसे निलंबित कर दिया गया।

इसके बाद, आपराधिक मामले में कथित संलिप्तता को आधार बनाते हुए CISF प्रशासन ने उसकी सेवा समाप्त कर दी। इस आदेश को याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में चुनौती दी।

सिंगल जज का फैसला

हाईकोर्ट के सिंगल जज ने यह कहते हुए सेवा समाप्ति का आदेश रद्द कर दिया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने के लिए कोई ठोस तथ्यात्मक या कानूनी आधार नहीं था। सिंगल जज के इस फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने खंडपीठ में विशेष अपील दायर की।

खंडपीठ की टिप्पणी

खंडपीठ ने CISF अधिनियम, 1968 की धारा 8(1) और संविधान के अनुच्छेद 311 का हवाला देते हुए कहा कि किसी कर्मचारी को हटाने या बर्खास्त करने के लिए यह साबित होना आवश्यक है कि उसने कर्तव्यों में लापरवाही, अनुशासनहीनता या अयोग्यता दिखाई है।

अदालत ने कहा कि इस मामले में कर्मचारी के खिलाफ एकमात्र आधार उसका जेल जाना था, जबकि आपराधिक मुकदमा अभी लंबित है और किसी भी प्रकार की दोषसिद्धि नहीं हुई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब तक किसी कर्मचारी को दोषी ठहराया नहीं जाता, तब तक केवल आरोप या हिरासत के आधार पर यह मान लेना कि उसने सेवा में सत्यनिष्ठा या कर्तव्यनिष्ठा का उल्लंघन किया है, केवल अनुमान पर आधारित है।

खंडपीठ ने टिप्पणी की कि ऐसे हालात में सेवा से हटाने का आदेश कानूनन स्वीकार्य नहीं है।

सेवानिवृत्ति और लाभों पर निर्णय

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अब सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त कर चुका है। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मुकदमे के लंबित रहने की अवधि के दौरान उसे निलंबन की स्थिति में माना जा सकता है। वेतन, बकाया राशि और सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान को लेकर निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा लागू नियमों के अनुसार लिया जाएगा।

यह फैसला CISF समेत अन्य केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों के कर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है, जिसमें यह साफ किया गया है कि केवल आरोप या जेल जाने के आधार पर, बिना दोषसिद्धि के, किसी कर्मचारी को सेवा से बाहर नहीं किया जा सकता।

Spread the love

Editorial Desk – News of Paramilitary

Editorial Desk, News of Paramilitary, covers verified news, policy updates and field reports related to India’s Paramilitary Forces. Content is published following strict editorial standards.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page