पत्नी की बीमारी का हवाला देकर CRPF ASI ने मांगी राहत, हाईकोर्ट ने Transfer पर रोक से किया इनकार
CRPF ASI Transfer Case: गौहाटी हाईकोर्ट ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (GD) के गुवाहाटी से छत्तीसगढ़ किए गए तबादले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। ASI ने अपनी पत्नी की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए तबादले से राहत मांगी थी।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में तबादला सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और अदालत ऐसे मामलों में सीमित परिस्थितियों में ही हस्तक्षेप कर सकती है।
गुवाहाटी से 231 बटालियन में हुआ था तबादला
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता CRPF में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (GD) के पद पर कार्यरत है और गुवाहाटी के अमेरिगोग में तैनात था।
CRPF की ओर से 24 दिसंबर 2025 को उसका तबादला छत्तीसगढ़ स्थित 231 बटालियन में किया गया था। ASI ने इस तबादला आदेश को चुनौती देते हुए गौहाटी हाईकोर्ट का रुख किया।
पत्नी की बीमारी को बनाया राहत का आधार
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उसकी पत्नी एंग्जायटी डिसऑर्डर से पीड़ित है और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उसी पर है। इस कारण उसने गुवाहाटी से छत्तीसगढ़ भेजे जाने वाले तबादले से राहत की मांग की।
इसके अलावा अधिकारी ने पहले अपनी बेटी की NEET परीक्षा की तैयारी से जुड़ी पारिवारिक परिस्थिति का भी हवाला दिया था। हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने आया कि संबंधित परीक्षा पूरी हो चुकी है।
तबादले में कोर्ट का हस्तक्षेप सीमित: हाईकोर्ट
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय कुमार मेधी ने तबादले से जुड़े मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप के सीमित दायरे पर जोर दिया।
कोर्ट ने माना कि सरकारी कर्मचारी की सेवा में तबादला एक सामान्य प्रक्रिया है। अदालत आमतौर पर तभी हस्तक्षेप करती है, जब तबादला आदेश में किसी वैधानिक नियम का उल्लंघन दिखाई दे या उसके पीछे स्पष्ट दुर्भावना का मामला सामने आए।
इस मामले में हाईकोर्ट को ऐसी कोई परिस्थिति नहीं मिली, जिसके आधार पर तबादला आदेश पर रोक लगाई जा सके।
ASI को पहले भी मिला था समय
मामले में केंद्र की ओर से दलील दी गई कि ASI की परिस्थितियों पर पहले ही विचार किया जा चुका है। असम में चुनाव के कारण भी तबादले को कुछ समय के लिए रोका गया था।
कोर्ट ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा कि तबादला आदेश दिसंबर 2025 में जारी हुआ था और अधिकारी को नई तैनाती पर जाने से पहले पर्याप्त समय मिल चुका है।
नई पोस्टिंग पर जाने के लिए मिले 15 दिन
हाईकोर्ट ने तबादले पर रोक लगाने से तो इनकार कर दिया, लेकिन ASI की पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए उसे राहत के तौर पर 15 दिन का समय दिया।
इस अवधि के भीतर ASI को नई पोस्टिंग पर रिपोर्ट करने की अनुमति दी गई। साथ ही नई तैनाती वाली जगह पर पत्नी के इलाज से संबंधित व्यवस्था करने के लिए उचित अवसर दिए जाने की बात भी कही गई।
CAPF जवानों के लिए क्यों अहम है फैसला?
यह फैसला CAPF जवानों,के तबादले से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू को सामने रखता है। व्यक्तिगत या पारिवारिक कठिनाइयों के आधार पर कर्मचारी विभाग के समक्ष अपनी समस्या रख सकता है, लेकिन केवल ऐसी परिस्थितियों के आधार पर अदालत से तबादले पर रोक मिलना जरूरी नहीं है।
अदालत मुख्य रूप से यह देखती है कि तबादला सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमों के तहत किया गया है या नहीं और आदेश में दुर्भावना या कानूनी नियमों का उल्लंघन तो नहीं है।
नोट: यह खबर उपलब्ध न्यायिक रिपोर्ट पर आधारित है। पाठकों को किसी व्यक्तिगत सेवा या तबादला संबंधी मामले में संबंधित विभागीय नियमों और मूल न्यायिक आदेश को प्राथमिकता देनी चाहिए।
Source: Law Trend

