CRPF इंस्पेक्टरों की बड़ी कानूनी जीत: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सरकार की SLP, दिल्ली हाईकोर्ट ने थमाया अवमानना नोटिस
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के इंस्पेक्टरों ने अपने हक की लंबी कानूनी लड़ाई में एक निर्णायक जीत हासिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार द्वारा दायर ‘विशेष अनुमति याचिका’ (SLP) को खारिज कर दिया है, वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने अदालती आदेश लागू न करने पर सरकार और सीआरपीएफ प्रशासन को अवमानना का नोटिस जारी किया है।
दोहरी जीत: सुप्रीम कोर्ट से राहत, हाईकोर्ट में सरकार पर शिकंजा
सीआरपीएफ इंस्पेक्टर गजेंद्र सिंह, सुरेश कुमार यादव और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने 9 फरवरी को सरकार की एसएलपी को सिरे से खारिज कर दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व में आदेश दिया था कि जिन इंस्पेक्टरों का ग्रेड पे 4800 रुपये है और वे इस पद पर 4 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें 5400 रुपये का ग्रेड पे दिया जाए। सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जहाँ उसे मुंह की खानी पड़ी।
हाईकोर्ट ने थमाया अवमानना का नोटिस
दूसरी ओर, सुरेश यादव सहित 71 इंस्पेक्टरों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद सीआरपीएफ प्रशासन इसे लागू करने में टालमटोल कर रहा है। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 18 मई को तय की गई है।
क्या है पूरा मामला? (2008 का ‘ओएम’ और विवाद)
विवाद की जड़ वित्त मंत्रालय द्वारा 29 अगस्त 2008 को जारी किया गया एक ‘कार्यालय ज्ञापन’ (OM) है।
- नियम: इस ओएम के तहत केंद्र सरकार के उन सभी कर्मियों को, जो 4800 रुपये के ग्रेड पे पर हैं और 4 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें 5400 रुपये का ग्रेड पे मिलना चाहिए।
- भेदभाव: सरकार ने यह लाभ अन्य विभागों में तो दिया, लेकिन अर्धसैनिक बलों (CAPFs) के इंस्पेक्टरों को इससे वंचित रखा।
- तर्क: सरकार का तर्क था कि यह लाभ केवल ‘ग्रुप बी’ के पदोन्नत अधिकारियों के लिए है, न कि सभी के लिए।
आईटीबीपी के सुशील कुमार ने दिखाई थी राह
इस हक की लड़ाई सबसे पहले आईटीबीपी (ITBP) के इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने शुरू की थी। सुप्रीम कोर्ट तक चली लंबी कानूनी जंग के बाद सुशील कुमार को जीत मिली और अब वे 5400 रुपये ग्रेड पे के साथ सहायक कमांडेंट के पद पर कार्यरत हैं।
15 साल से एक ही रैंक पर, पदोन्नति का इंतजार
सीआरपीएफ के इंस्पेक्टरों की स्थिति यह है कि वे लगभग 15 वर्षों से एक ही रैंक पर काम कर रहे हैं। पदोन्नति न मिलने के कारण उनमें भारी निराशा है।
”हैरानी की बात यह है कि पदोन्नति तो दूर, सरकार वह वित्तीय लाभ (5400 ग्रेड पे) देने को भी तैयार नहीं थी, जो नियमतः 2008 से ही लागू होना चाहिए था।” – वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुर छिब्बर
केस की महत्वपूर्ण कड़ियाँ:
- 15 अक्टूबर 2025: जस्टिस हरि शंकर और ओम प्रकाश शुक्ला ने सीआरपीएफ इंस्पेक्टरों (GD और फार्मासिस्ट) के पक्ष में फैसला सुनाया।
- 8 सप्ताह का समय: हाईकोर्ट ने सरकार को फैसला लागू करने के लिए दो महीने का समय दिया था।
- अवमानना याचिका: समय सीमा बीतने के बाद इंस्पेक्टरों ने दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कानूनी पेच और मद्रास हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
इस पूरी कानूनी लड़ाई की नींव मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले पर टिकी है, जो सीबीडीटी (CBDT) के इंस्पेक्टर एम. सुब्रमणयम के मामले में आया था। वहां भी सरकार ने इसी तरह के तर्क दिए थे, जिन्हें हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। सरकार ने एक के बाद एक दो ‘रिव्यू पिटीशन’ डालीं, लेकिन दोनों ही बार हार का सामना करना पड़ा। अंततः सीबीडीटी को यह नियम मानना पड़ा, जिसके बाद अब अर्धसैनिक बलों के लिए भी रास्ता साफ हो गया है।
अब सबकी नजरें 18 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ सरकार को कोर्ट में जवाब देना होगा कि उसने अब तक इंस्पेक्टरों को उनका हक क्यों नहीं दिया।

