तेलंगाना हाईकोर्ट का अहम फैसला: लापता CRPF जवान के परिजनों को मिलेगी सेवा व पेंशन लाभ
हैदराबाद। तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) अपने किसी भी जवान के प्रति जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। कोर्ट ने वर्ष 2015 से लापता एक CRPF कांस्टेबल के परिजनों को सेवा एवं पेंशन संबंधी लाभ देने का आदेश दिया है और जवान को सेवा से हटाने का 2017 का आदेश रद्द कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति जी. एम. मोहीउद्दीन की खंडपीठ ने 19 जनवरी को दिए अपने फैसले में कहा कि लापता जवान के मामले में उसके पिता द्वारा एफआईआर दर्ज न कराना, सेवा लाभ देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि CRPF इस तरह का रवैया अपनाता है तो इससे परिवार अपने बच्चों को बल में भेजने से हतोत्साहित होंगे।
मामला CRPF कांस्टेबल श्रीकांत से जुड़ा है, जो 2015 में ड्यूटी के दौरान लापता हो गया था। काफी समय तक तलाश के बावजूद उसका कोई पता नहीं चला। इसके बावजूद CRPF ने उसे ‘डेज़र्टर’ घोषित करते हुए 28 जनवरी 2017 को सेवा से हटा दिया।
वर्ष 2021 में श्रीकांत के पिता एम. अप्पा राव ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस आदेश को चुनौती दी और लापता कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार के 2013 के कार्यालय ज्ञापन के तहत लाभ देने की मांग की। CRPF की ओर से दलील दी गई कि परिजनों ने न तो एफआईआर दर्ज कराई और न ही पुलिस से कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की।
कोर्ट ने कहा कि श्रीकांत अपने पिता की नहीं, बल्कि अपने “रेजिमेंटल परिवार” यानी CRPF के कमांड और नियंत्रण में था। ऐसे में यह जिम्मेदारी बल की बनती है कि वह जवान के लापता होने से जुड़े रिकॉर्ड और साक्ष्य सुरक्षित रखे। कोर्ट ने यह भी कहा कि विभागीय कार्रवाई कर उसे सेवा से हटाना कानूनन सही नहीं है।
अंत में कोर्ट ने CRPF को निर्देश दिया कि श्रीकांत को पिछले 10 वर्षों से लापता मानते हुए उसके वैध उत्तराधिकारियों या नामित व्यक्तियों को सभी पात्र सेवा एवं पेंशन लाभ का भुगतान किया जाए। कोर्ट ने याचिका को पूरी तरह स्वीकार कर लिया और सभी लंबित अर्जियों को भी समाप्त कर दिया।

