CAPF में तीन IPS अधिकारियों की नियुक्तियों के बीच कैडर अधिकारियों का मुद्दा फिर चर्चा में, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर उठे सवाल
केंद्र सरकार ने हाल ही में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को महत्वपूर्ण नेतृत्व पदों पर नियुक्त करने को मंजूरी दी है। इन नियुक्तियों के तहत सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) में वरिष्ठ स्तर पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के माध्यम से पोस्टिंग की गई है।
आदेश के अनुसार, आईपीएस दलीतजीत सिंह (बिहार कैडर, 2007 बैच) को BSF में महानिरीक्षक (IG), आईपीएस राजीव मिश्रा (बिहार कैडर, 2010 बैच) को CISF में उप महानिरीक्षक (DIG) और आईपीएस शलभ माथुर (उत्तर प्रदेश कैडर, 2006 बैच) को CRPF में महानिरीक्षक (IG) नियुक्त किया गया है।
इन नियुक्तियों के साथ ही CAPF के कैडर (गजेटेड) अधिकारियों से जुड़ा मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही CAPF अधिकारियों के पक्ष में NFU (Non-Functional Upgradation) और OGAS (Organised Group ‘A’ Service) से जुड़े मामलों में स्पष्ट फैसला दे चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में CAPF को एक संगठित ग्रुप-ए सेवा माना और यह स्पष्ट किया कि बलों के कैडर अधिकारियों को अन्य केंद्रीय सेवाओं के समान करियर प्रगति और वेतन लाभ मिलने चाहिए। कोर्ट ने यह भी माना कि CAPF अधिकारी केवल सहायक भूमिका में नहीं, बल्कि कमांड और ऑपरेशनल नेतृत्व निभाने वाले अधिकारी हैं।
IPS deputation घटाने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में CAPF में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को चरणबद्ध तरीके से घटाने के निर्देश दिए थे, विशेष रूप से IG और उससे नीचे के स्तरों पर। बाद में केंद्र सरकार की समीक्षा याचिका भी खारिज कर दी गई, जिससे कोर्ट का आदेश अंतिम रूप से प्रभावी हो गया।
इसके बावजूद, हालिया नियुक्तियों और गृह सचिव द्वारा राज्यों को IPS अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए भेजने संबंधी पत्र ने इस बहस को फिर तेज कर दिया है कि क्या सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूर्ण अनुपालन हो रहा है।
कैडर अधिकारियों की प्रमुख मांग
CAPF कैडर अधिकारियों का तर्क है कि—
- वे पूरे करियर के दौरान एक ही बल में सेवा करते हैं
- कठिन फील्ड और ऑपरेशनल क्षेत्रों में दशकों का अनुभव प्राप्त करते हैं
- बल की संरचना, संस्कृति और कमांड सिस्टम को गहराई से समझते हैं
ऐसे में शीर्ष नेतृत्व पदों पर उनकी भागीदारी बढ़ाने से ऑपरेशनल निरंतरता, संस्थागत स्थिरता और बल का मनोबल मजबूत होगा।
प्रशासनिक पक्ष
सरकार का कहना है कि IPS अधिकारियों की तैनाती से प्रशासनिक अनुभव और अंतर-राज्यीय समन्वय का लाभ मिलता है, साथ ही कई बार राज्यों से IPS नाम समय पर न आने के कारण वरिष्ठ पद रिक्त रह जाते हैं, जिससे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति आवश्यक हो जाती है।
CAPF से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के NFU, OGAS और IPS deputation घटाने के फैसलों के बाद यह अपेक्षा की जा रही थी कि कैडर अधिकारियों को नेतृत्व में अधिक अवसर मिलेंगे। मौजूदा नियुक्तियों ने इस मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और CAPF कैडर अधिकारियों की भूमिका के बीच किस तरह संतुलन स्थापित करता है।

