8वां वेतन आयोग: CRPF के कांस्टेबल से IG तक रखेंगे अपनी बात, 30 सदस्यीय बोर्ड गठित
केंद्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य आर्थिक लाभों में बदलाव के लिए गठित आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष अपनी मजबूत पैरवी सुनिश्चित करने के लिए देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ (CRPF) ने एक अहम कदम उठाया है। आयोग का गठन गत वर्ष 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में किया गया था, जो 18 महीनों में अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा।
इसी क्रम में सीआरपीएफ ने पहले गठित सात सदस्यीय विशेष बोर्ड में बड़ा बदलाव करते हुए अब सभी रैंकों के 30 प्रतिनिधियों को शामिल किया है। इस नए स्वरूप वाले बोर्ड के जरिए अब कांस्टेबल से लेकर आईजी रैंक तक के जवान और अधिकारी अपने सुझाव सीधे आठवें वेतन आयोग तक पहुंचा सकेंगे। यह बोर्ड केंद्रीय गृह मंत्रालय के माध्यम से अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें वेतन आयोग को सौंपेगा।
बोर्ड की अध्यक्षता और प्रारंभिक गठन
सीआरपीएफ ने 2 जनवरी को एडीजी (हेडक्वार्टर) संदीप खिरवार की अध्यक्षता में विशेष बोर्ड का गठन किया था। इसमें आईजी (पर्स) मितेश जैन, डीआईजी किशोर प्रसाद, डीआईजी पदम कुमार, कमांडेंट वाई.एन. राय, डीएफए अभिषेक सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और मिनिस्ट्रियल व जीडी संवर्ग के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था।
अब सभी रैंकों को मिली भागीदारी
संशोधित बोर्ड में अब सीआरपीएफ के हर स्तर के कार्मिकों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। इसमें एसएमओ, डिप्टी कमांडेंट, सहायक कमांडेंट, इंस्पेक्टर, उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक, हवलदार और सिपाही (पुरुष एवं महिला) रैंक तक के प्रतिनिधि शामिल हैं। कुल मिलाकर 30 सदस्य आठवें वेतन आयोग के लिए सुझाव तैयार करेंगे।
बोर्ड के चेयरपर्सन को यह अधिकार भी दिया गया है कि वे आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त या तकनीकी सदस्यों को भी शामिल कर सकें।
जोखिम भरे इलाकों की हकीकत आयोग तक पहुंचेगी
सीआरपीएफ देश में आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ मानी जाती है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद, उत्तर-पूर्व में उग्रवाद और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सबसे अधिक जोखिम वाली ड्यूटी सीआरपीएफ ही निभा रही है। नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सीआरपीएफ और उसकी विशेष इकाई कोबरा (CoBRA) की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। सरकार का लक्ष्य है कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त किया जाए।
बोर्ड की रिपोर्ट में इन जोखिम भरे इलाकों में तैनाती के दौरान जवानों को आने वाली कठिनाइयों, ट्रांसपोर्ट सुविधाओं की कमी, खराब सड़कें, बुनियादी ढांचे की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाएं, जोखिम भत्ता, एचआरए और अन्य सुविधाओं का विस्तृत उल्लेख किया जाएगा।
पदोन्नति और लंबित मुद्दे भी होंगे शामिल
सीआरपीएफ में लंबे समय से कैडर रिव्यू नहीं होने के कारण पदोन्नति एक बड़ी समस्या बनी हुई है। सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक के कार्मिकों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है।
इसके अलावा पुरानी पेंशन (OPS) ,संगठित समूह ‘ए’ सेवा (OGAS), नॉन-फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (NFFU) और 2008 के वित्त मंत्रालय के ओएम से जुड़े मुद्दे भी बोर्ड की सिफारिशों में शामिल किए जा सकते हैं। वर्तमान व्यवस्था में इंस्पेक्टरों को 4800 से 5400 ग्रेड पे के लिए अदालतों का सहारा लेना पड़ता है, जिसे लेकर भी ठोस सुझाव दिए जाएंगे।
उम्मीदें आठवें वेतन आयोग से
सीआरपीएफ को उम्मीद है कि आठवां वेतन आयोग उसकी जोखिम भरी ड्यूटी, बलिदान और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वेतन-भत्तों और सुविधाओं में ठोस सुधार की सिफारिश करेगा। व्यापक प्रतिनिधित्व वाले इस बोर्ड के गठन से यह संदेश साफ है कि अब हर रैंक की आवाज सीधे नीति निर्माण तक पहुंचेगी।
(SOURCE – AMAR UJALA)

