SSB ड्राइवर की बर्खास्तगी अवैध, हाईकोर्ट ने दी 14 साल बाद सेवा में बहाली — गंभीर आरोप साबित न होने पर कार्रवाई रद्द
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सशस्त्र सीमा बल (SSB) के लांस नायक/ड्राइवर पुरुषोत्तम दत्त की बर्खास्तगी को अवैध और असंवैधानिक करार देते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने वर्ष 2011 में जारी बर्खास्तगी आदेश और 2017 में पारित अपीलीय आदेश—दोनों को निरस्त कर दिया।
यह फैसला न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने सुनाया। मामले में एसएसबी के महानिदेशक सहित अन्य अधिकारी पक्षकार थे।
◼ आरोप साबित नहीं — कोई मेडिकल या वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि पुरुषोत्तम दत्त पर ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में वाहन चलाने के गंभीर आरोप को साबित करने के लिए विभाग कोई भी ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका।
- न ब्लड टेस्ट,
- न यूरीन टेस्ट,
- न ब्रेथ एनालाइजर,
इनमें से कोई भी परीक्षण नहीं कराया गया था।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि केवल मौखिक आरोपों के आधार पर किसी कर्मचारी को बर्खास्त नहीं किया जा सकता। संदेह को प्रमाण का स्थान नहीं दिया जा सकता।
◼ 2007 की सड़क दुर्घटना से जुड़ा था मामला
यह मामला 2 नवंबर 2007 को हुई उस दुर्घटना से संबंधित है, जिसमें एक सरकारी वाहन खाई में गिर गया था। हादसे में एक जवान की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।
पुरुषोत्तम दत्त ने बताया था कि दुर्घटना सड़क की साइड रिटेनिंग वॉल टूटने और अचानक सामने आए एक जंगली जानवर (बाघ) को बचाने की कोशिश में हुई थी।
◼ पुलिस व मजिस्ट्रेट जांच ने ड्राइवर को क्लीन चिट दी थी
सिविल पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ था कि दुर्घटना रिटेनिंग वॉल टूटने के कारण हुई थी और ड्राइवर की कोई लापरवाही नहीं थी। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने भी पुलिस की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार कर ली थी।
इसके बावजूद विभागीय जांच में इन तथ्यों तथा सहयात्रियों के बयानों को नजरअंदाज कर दिया गया—जिसे हाईकोर्ट ने “गंभीर त्रुटि” कहा।
◼ 14 साल बाद रोजगार का अधिकार बहाल
हाईकोर्ट ने कहा कि बिना प्रमाण किसी कर्मचारी को बर्खास्त करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है। अदालत ने पुरुषोत्तम दत्त को तुरंत सेवा में पुनः बहाल करने का आदेश दिया है।
