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CAPF NEWS

अब बदलेंगे हालात: सुप्रीम कोर्ट ने CAPF अधिकारियों को दिया हक,अब गृह मंत्रालय से शीघ्र अमल की उम्मीद

भारत की आंतरिक और सीमाई सुरक्षा संभालने वाले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के लिए 23 मई 2025 का दिन इतिहास में दर्ज हो गया। इस दिन सुप्रीम कोर्ट ने वह फैसला सुनाया, जिसका इंतज़ार हज़ारों अधिकारियों को वर्षों से था।
न्यायालय ने साफ कहा — “इन अधिकारियों में नेतृत्व की पूरी क्षमता है, इन्हें उनका हक़ मिलना चाहिए।”

गृह मंत्रालय की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को भी अदालत ने 28 अक्टूबर को खारिज कर दिया, जिससे यह निर्णय अंतिम और बाध्यकारी बन गया। अब देश के इन जाबांज़ अधिकारियों को अपने ही बलों की कमान संभालने का रास्ता खुल गया है।

मैदान में सीखे, अब नेतृत्व का समय

CAPF अधिकारी वह वर्ग हैं जिन्होंने अपनी क्षमता किताबों से नहीं, बल्कि सीमाओं, जंगलों और मोर्चों पर सीखी है।
चाहे 1971 का भारत-पाक युद्ध हो, कारगिल की लड़ाई या लद्दाख की चोटियों पर तैनाती, हर जगह इन अधिकारियों ने अपने साहस, अनुशासन और रणनीतिक बुद्धिमत्ता का परिचय दिया है।
अब वही अनुभव नेतृत्व की कुर्सी तक पहुंचेगा — और यही इस फैसले की असली जीत है।


संविधान और न्याय की जीत

भारतीय संविधान “संघ के अन्य सशस्त्र बलों” को विशेष दर्जा देता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन बलों का नेतृत्व उन्हीं के बीच से होना चाहिए — जो उनकी संस्कृति, कार्यशैली और कठिनाइयों को जी चुके हों।
यह निर्णय केवल एक कानूनी आदेश नहीं, बल्कि संवैधानिक संतुलन और पेशेवर आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

सुधारों की नई दिशा

फैसले के बाद अब CAPF अधिकारियों को ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप ‘A’ सर्विस (OGAS) का दर्जा और नॉन-फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (NFFU) मिलेगा।
इससे न केवल कैरियर ग्रोथ के रास्ते खुलेंगे, बल्कि बलों के भीतर मनोबल और स्थिरता भी मजबूत होगी।

यह सुधार सिर्फ वेतन या पद का नहीं, बल्कि सम्मान और आत्मगौरव का भी है।


‘औपनिवेशिक सोच’ से आज़ादी की ओर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने “पंच प्रण” में देश को औपनिवेशिक सोच से मुक्त करने का आह्वान किया था।
CAPF में नेतृत्व की यह स्वायत्तता उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
अब हमारे बलों का नेतृत्व वे करेंगे जिन्होंने भारत के लिए पसीना, खून और जीवन समर्पित किया है।

अमल ही असली परीक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय दे दिया है — अब जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है।
अगर इस फैसले को समयबद्ध तरीके से लागू किया गया, तो यह भारत की सुरक्षा प्रणाली को और अधिक पेशेवर, आत्मनिर्भर और जवाबदेह बनाएगा।

यह फैसला केवल कानून की नहीं, सम्मान और न्याय की जीत है।
अब वक्त है — कदम बढ़ाने का, हक़ निभाने का, और नए भारत की सुरक्षा सोच को आकार देने का।

(POST CREDIT – Rattan Chand Sharma, Commandant (Retd) BSF )

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